भोपाल, 17 सितंबर भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के हित में काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन ने मध्यप्रदेश सरकार से इस आपदा से विधवा हुई महिलाओं की पेंशन फिर से शुरु करने की मांग की है। इनमें से कुछ विधवाएं पिछले दो दिन से क्रमिक भूख हड़ताल कर रही हैं।
गैस पीड़ित निराश्रित पेंशन भोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘हम प्रदेश सरकार से दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक त्रासदी से विधवा हुई 4,998 महिलाओं के लिये एक हजार रुपये की मासिक पेंशन फिर से शुरु करने की मांग करते हैं।’’
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उन्होंने कहा, ‘‘इन विधवाओं को दिसंबर 2019 से पेंशन नहीं मिल रहा है। कोविड-19 के इस संकट काल में ये विधवाएं दरिद्रता की स्थिति में रह रही हैं।’’
नामदेव ने कहा, ‘‘भोपाल गैस त्रासदी में अपने पतियों को खोने वाली ये विधवाएं जीवन ज्योति कॉलोनी में क्रमिक भूख हड़ताल कर रही हैं। उनकी हड़ताल का बृहस्पतिवार को तीसरा दिन है।’’
उन्होंने बताया कि भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास विभाग की वर्ष 2011-12 की रिपोर्ट में इन विधवाओं को आजीवन पेंशन दिये जाने की घोषणा की थी।
नामदेव ने बताया कि केन्द्र सरकार के 30 करोड़ रुपये की सहायता से वर्ष 2011 में 4,998 विधवाओं के लिये पेंशन शुरु की गयी थी।
उन्होंने कहा कि इन विधवाओं को सरकार ने अप्रैल 2016 से पेंशन देना रोक दी। इसके बाद नवंबर 2017 में पेंशन को फिर से शुरु किया गया। विधवाओं को समय पर पेंशन मिले यह सुनिश्चित करने के लिये एक तंत्र होना चाहिये। विधवाओं की पेंशन रोककर सरकार ने इन्हें धोखा दिया है।
गौरतलब है कि दिसंबर वर्ष 1984 में भोपाल के एक कीटनाशक संयंत्र यूनियन कार्बाइड कारखाने से एक ज़हरीली गैस का रिसाव ने हजारों लोगों की जान ले ली थी। यह दुनिया की सबसे भयंकर औद्योगिक त्रासदी थी।
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