प्रयागराज, 14 अक्तूबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को प्रत्येक जिले में किशोर न्याय बोर्ड के गठन के लिए तेजी से कदम उठाने का निर्देश दिया है।
किसी दंड संहिता के उल्लंघन के आरोपी बच्चों के संबंध में उपायों समेत उचित उपाय करने के लिए इस बोर्ड का गठन किया जाता है।
अदालत ने सोमवार को पारित एक आदेश में राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि इस बोर्ड में रिक्त पदों को तेजी से भरा जाए और पद रिक्त होने की तिथि से कम से कम छह महीने पूर्व रिक्तियों को भरने के लिए कदम उठाए जाएं।
ईश्वरी प्रसाद तिवारी नाम के व्यक्ति द्वारा दायर रिट याचिका को निस्तारित करते हुए न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पीठ ने कहा, ‘‘यह अदालत एक बार फिर से दोहराती है कि बोर्ड का निष्क्रिय होना संविधान के अनुच्छेद 15(3) की भावना के खिलाफ है जो यह व्यवस्था करता है कि राज्य महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान करेगा।’’
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अदालत ने कहा, ‘‘हमें आशा और विश्वास है कि राज्य सरकार किशोर न्याय (बाल देखरेख एवं संरक्षण) कानून, 2015 के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी और इस संबंध में आगे की प्रगति से इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ को भी अवगत कराएगी जहां एक पीठ इसी तरह के मामले की सुनवाई कर रही है।’’
मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस अदालत के निर्देशों के बावजूद किशोर न्याय बोर्ड का गठन नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि नियुक्ति पर विचार के लिए वह पात्र है।
उल्लेखनीय है कि किशोर न्याय कानून की धारा 4 में प्रत्येक जिले के लिए बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान है। इस बोर्ड में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट या प्रथम दर्जे के एक न्यायिक मजिस्ट्रेट और दो सामाजिक कार्यकर्ताओं जिसमें कम से कम एक महिला हो, को शामिल करने की व्यवस्था है।
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