नयी दिल्ली, 19 सितंबर नागरिक संस्थाओं के सदस्यों ने मंगलवार को कहा कि सरकार को मणिपुर में लूटे गए हथियारों को बरामद करने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक एच.आर. सिंह ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में इस मुद्दे को उठाते हुए दावा किया कि जिस तरह से हथियार लूटे गए, ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन की लुटेरों के साथ ‘‘मिलीभगत’’ है।
मणिपुर में सेवा दे चुके सिंह ने कहा कि यह एक अनोखा मामला है और स्वतंत्र भारत में इतनी बड़ी घटना पहले कभी नहीं हुई।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि जब हथियार लूटे गए थे, तब राज्य प्रशासन की ओर से कोई प्रतिरोध नहीं हुआ था। कोई गोली नहीं चली, कोई टकराव नहीं हुआ।’’
उन्होंने राज्य सरकार पर स्थिति को नियंत्रित करने में असमर्थ होने का आरोप भी लगाया।
सीआरपीएफ के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि मणिपुर में पूरे राज्य तंत्र की कोई जिम्मेदारी नहीं है। यदि वे स्थिति को नियंत्रित नहीं कर सकते, तो मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक और अन्य को इस्तीफा दे देना चाहिए।’’
सिख चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष और राज्य में हथियारों की लूट पर उच्चतम न्यायालय में आवेदन दायर करने वाले ए. थियोस ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लूटे गए हथियार भारत के अन्य हिस्सों में पहुंच सकते हैं या आतंकवादियों के हाथों में पड़ सकते हैं।
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