नयी दिल्ली, एक सितंबर सरकार ने मंगलवार को भारत वस्तु निर्यात योजना (एमईआईएस) के तहत निर्यात प्रोत्साहन पर सीमा लगा दी। इसके तहत एक सितंबर से 31 दिसंबर, 2020 के बीच किये गये निर्यात को लेकर प्रति निर्यातक 2 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा।
राजस्व विभाग के वाणिज्य मंत्रालय से एमईआईएस योजना की समीक्षा के लिये कहे जाने के बाद यह कदम उठाया गया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कार्यक्रम के तहत राजकोषीय लाभ को कम कर 9,000 करोड़ रुपये के स्तर पर रखा जाए।
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विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में कहा, ‘‘एमईआईएस के तहत प्रोत्साहन को लेकर सीमा तय की गयी है। ताकि एक सितंबर 2020 से 31 दिसंबर, 2020 के बीच निर्यात के लिये आईईसी (आयात निर्यात कोड) धारक के दावे के तहत कुल आबंटन 2 करोड़ रुपये से अधिक नहीं हो।’’
पुन: अगर आईसी धारक ने एक सितंबर 2020 से पहले एक साल तक कोई निर्यात नहीं किया है या इस अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख या उसके बाद नये आईईसी प्राप्त करने वाले, योजना के तहत दावा करने के लिये पात्र नहीं होंगे।
डीजीएफटी ने यह भी कहा कि एमईआईएस एक जनवरी, 2021 से वापस ले लिया जाएगा।
अधिसूचना के अनुसार इसमें यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि एमईआईएस के तहत एक सितंबर से 31 दिसंबर, 2020 के दौरान कुल दावा सरकार द्वारा निर्धारित आबंटन 5,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं हो। अर्थात सीमा की बाद में जरूरत पड़ने पर समीक्षा की जा सकती है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘एक सितंबर से 31 दिसंबर, 2020 तक के निर्यात के लिये 2 करोड़ रुपये की सीमा से 98 प्रतिशत निर्यातक खासकर एमएसएमई को लाभ होगा। इससे जो सही निर्यातक हैं, उन्हें लाभ होगा...।’’
एमईआईएस के तहत सरकार उत्पाद और देश के आधार पर शुल्क लाभ उपलब्ध कराती है।
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