नयी दिल्ली, 23 जून सरकार सौर ऊर्जा उपकरण पर करीब 20 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क लगाने पर विचार कर रही है। इन उपकरणों के खासकर चीन से होने वाले आयात पर अंकुश लगाने और घरेलू विनिर्माताओं को प्रोत्साहन देने के लिये इस कदम पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि सौर ऊर्जा विकास से जुड़ी कंपनियों का मानना है कि 2022 तक 1,00,000 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है, ऐसे में सौर उपकरणों पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) लगाने के निर्णय का प्रतिकूल असर पड़ेगा।
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एक सूत्र ने कहा, ‘‘सरकार सौर उपकरणों पर करीब 20 प्रतिशत बीसीडी लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसका कारण है कि इन उपकरणों पर जो रक्षोपाय शुल्क लग रहा है, वह 29 जुलाई 2020 तक लागू है।’’
फिलहाल सौर सेल पर रक्षोपाय शुल्क 15 प्रतिशत है। यह 30 जुलाई 2020 से शून्य हो जाएगा।
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उल्लेखनीय है कि भारत ने जुलाई 2018 में चीन और मलेशिया से आयातित सौर सेल के आयात पर रक्षोपाय शुल्क दो साल के लिये लगाया था। इसका मकसद आयात में तीव्र वृद्धि से घरेलू विनिर्माताओं के हितों की रक्षा करना था।
सरकार ने 30 जुलाई 2018 से 29 जुलाई 2019 तक 25 प्रतिशत रक्षोपाय शुल्क लगाया था। यह धीरे-धीरे कम होकर 30 जुलाई 2019 से 29 जनवरी 2020 तक 20 प्रतिशत और 30 जनवरी, 2020 से 29 जुलाई 2020 तक 15 प्रतिशत पर आ गया।
सूत्र ने कहा, ‘‘चूंकि 30 जुलाई 2020 से सौर उपकरण के आयात पर शुल्क शून्य होगा, ऐसे में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय तथा वित्त मंत्रालय के बीच बीसीडी लगाने पर एक आंतरिक चर्चा हो रही है।’’
इस बीच, सोलर पावर डेवलपर्स एसोसिएशन (एसपीडीए) के महानिदेशक शेखर दत्त ने कहा, ‘‘सौर सेल और मोड्यूल पर 20 प्रतिशत बीसीडी लगाने का प्रस्ताव अगर अमल में आता है तो यह सौर बिजली क्षेत्र के विकास के लिहाज से प्रतिकूल कदम साबित होगा।’’
उन्होंने कहा कि रक्षोपाय शुल्क से शायद ही सौर सेल/मोड्यूल के उत्पादन या घरेलू कंपनियों की प्रतिस्पर्धी क्षमता में वृद्धि हुई हो।
दत्त ने कहा कि साथ ही इससे सेल, वैफर और इनगॉट जैसे कच्चे माल के आयात पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। कच्चे माल के आयात पर उद्योग की निर्भरता जस-की-तस बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि इस समय एक पूरा परिवेश तैयार करने के लिये एक व्यापक रणनीति बनाने की जरूरत है जो सौर मोड्यल्स के विनिर्माण की की पूरी मूल्य श्रृंखला को बढ़ावा दे। यानी उससे इनगॉट्स, वॉफर्स, सेल और मोड्ल्स के उत्पादन को बढ़ावा मिले।
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