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जरुरी जानकारी | सरकार का चावल के निर्यात पर अंकुश लगाने का इरादा नहीं

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जरुरी जानकारी | सरकार का चावल के निर्यात पर अंकुश लगाने का इरादा नहीं

नयी दिल्ली, 30 अगस्त चावल के निर्यात पर किसी तरह का अंकुश लगाने की सरकार की अभी कोई योजना नहीं है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए इस अनाज का पर्याप्त बफर स्टॉक देश के पास है। एक सरकारी सूत्र ने यह जानकारी दी है।

सूत्र ने कहा कि चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बारे में कुछ चर्चा जरूर हुई है, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार द्वारा अभी किसी तरह का अंकुश लगाने की संभावना नहीं है।

चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक भारत वैश्विक व्यापार में 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश ने वित्त वर्ष 2021-22 में 2.12 करोड़ टन चावल का निर्यात किया, जिसमें से 39.4 लाख टन बासमती चावल था। इसी अवधि में देश ने 6.11 अरब डॉलर मूल्य के गैर-बासमती चावल का भी निर्यात किया।

देश ने वर्ष 2021-22 में 150 से अधिक देशों को गैर-बासमती चावल का निर्यात किया।

कुछ राज्यों में कम बारिश के कारण इस खरीफ बुवाई के मौसम में अब तक धान का रकबा छह प्रतिशत घटकर 367.55 लाख हेक्टेयर रह गया है। ऐसे में चिंता जताई जा रही है कि फसल वर्ष 2022-23 (जुलाई-जून) में चावल का उत्पादन घट सकता है।

व्यापारियों को डर है कि मौजूदा स्थिति केंद्र को चावल के निर्यात पर कुछ अंकुश लगाने के लिए मजबूर कर सकती है जैसा कि गेहूं के मामले में हुआ है।

धान मुख्य खरीफ फसल है, जिसकी बुवाई जून से दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ शुरू होती है और अक्टूबर से कटाई शुरू होती है।

पिछले फसल वर्ष में चावल का उत्पादन बढ़कर 13 करोड़ 2.9 लाख टन हो गया, जो वर्ष 2020-21 में 12 करोड़ 43.7 लाख टन था।

पिछले कुछ वर्षों में भारी उत्पादन और उच्च खरीद के बल पर केंद्र के पास एक जुलाई तक बगैर मिलिंग वाले धान के बराबर चावल सहित 4.7 करोड़ टन चावल का स्टॉक बचा हुआ है। जबकि एक जुलाई की स्थिति के अनुसार चावल के बफर स्टॉक की जरुरत 1.35 करोड़ टन की ही थी।

पहले से ही केंद्र राशन की दुकानों के माध्यम से गेहूं के बजाय अधिक चावल की आपूर्ति कर रहा है क्योंकि इस विपणन वर्ष में गेहूं की खरीद घटकर 1.9 करोड़ टन रह गई है, जबकि एक साल पहले की इसी अवधि में यह खरीद 4.3 करोड़ टन की हुई थी।

गेहूं विपणन वर्ष अप्रैल से मार्च तक होता है लेकिन लगभग पूरी मात्रा में अनाज जून के अंत तक खरीद लिया जाता है।

मौजूदा समय में, सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (एमएफएसए) के तहत क्रमशः दो रुपये और तीन रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से गेहूं और चावल उपलब्ध करा रही है। यह खाद्यान्न लगभग 80 करोड़ लोगों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत मुफ्त प्रदान किया जाता है।

केंद्र एनएफएसए के तहत प्रति व्यक्ति प्रति माह पांच किलोग्राम खाद्यान्न (गेहूं और चावल) उपलब्ध करा रहा है। इसके अलावा पीएमजीकेएवाई के तहत प्रति व्यक्ति पांच किलोग्राम अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है।

पीएमजीकेएवाई योजना सितंबर तक वैध है और सरकार ने अभी इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है कि गेहूं के संबंध में कमजोर स्टॉक की स्थिति और चावल उत्पादन में संभावित गिरावट के बीच इस कल्याण कार्यक्रम का विस्तार किया जाए या नहीं।

राजेश

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(The above story first appeared on LatestLY on Aug 30, 2022 07:13 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).