देश की खबरें | अच्छा स्क्रीन समय बनाम खराब स्क्रीन समय : कोविड-19 की वजह से लागू ऑनलाइन शिक्षा पर विशेषज्ञों की बहस
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कोविड-19 की वजह से बच्चों की पढ़ाई के लिये जरूरी बन गई ऑनलाइन शिक्षा पर विशेषज्ञों का सुझाव है कि डिजिटल लर्निंग में अभिभावकों का निर्देशन, उत्पादक और अनुत्पादक स्क्रीन टाइम और एक तरफा वीडियो लेक्चर सत्र के बजाय परस्पर संवाद वाले सत्रों को शामिल किया जाए।
नयी दिल्ली, पांच जुलाई कोविड-19 की वजह से बच्चों की पढ़ाई के लिये जरूरी बन गई ऑनलाइन शिक्षा पर विशेषज्ञों का सुझाव है कि डिजिटल लर्निंग में अभिभावकों का निर्देशन, उत्पादक और अनुत्पादक स्क्रीन टाइम और एक तरफा वीडियो लेक्चर सत्र के बजाय परस्पर संवाद वाले सत्रों को शामिल किया जाए।
फिक्की एआरआईएसई (अलायंस फॉर री-इमेजनिंग स्कूल एजुकेशन) द्वारा “अच्छा स्क्रीन समय बनाम बुरा स्क्रीन समय” विषय पर आयोजित एक वेबिनार में विशेषज्ञों ने अपना पक्ष रखा। इस वेबिनार का उद्देश्य ऑनलाइन लर्निंग की प्रकृति और आवश्यकता का सही आकलन करना था।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र विशु कार्तिक ने कहा, “कोई स्क्रीन देखने में कितना वक्त बिता रहा है इसके बजाए किसी व्यक्ति की कुशलता पर इस बात का असर ज्यादा पड़ता है कि वह क्या देख रहा है और उसका संदर्भ क्या है। उत्पातक और अनुत्पादक स्क्रीन समय का अंतर करना अनिवार्य था। स्क्रीन टाइम जहां कोई वयस्क स्क्रीन के दूसरी तरफ बच्चों को सिखाने के क्रम में अपने साथ जोड़े रखता है उसे नुकसानदायक नहीं माना जा सकता।”
उन्होंने कहा, “इसके अलावा शिक्षकों को भी इस चीज के लिये प्रशिक्षित होना चाहिए कि ये एक तरफा व्याख्यान न हों और वहां निश्चित रूप से किसी न किसी तरह परस्पर संवाद हो और पाठ के दौरान ऐसे काम जोड़े जाने चाहिए जिससे बच्चा स्वतंत्र रूप से काम कर सके। वास्तव में संवाद और सामग्री की गुणवत्ता का असर पड़ता है न कि इस बात का कितना समय स्क्रीन पर दिया जा रहा है।”
प्रख्ताय शैक्षणिक मनोवैज्ञानिक और प्रशिक्षक रविंद्रन के मुताबिक विचार यह सीखने का है कि मौजूदा प्रौद्योगिकी का कैसे रचनात्मक इस्तेमाल किया जाए।
उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि लोगों में कब से स्क्रीन को लेकर एक अनियंत्रित भावना आने लगी। स्क्रीन पहले भी थे और आधुनिक दुनिया में भी स्क्रीन रहेंगे। दो साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन दिखाना अच्छा विचार नहीं है। हालांकि दो से तीन साल की उम्र के बच्चों को कोई गतिविधि सिखाने के लिये दो से तीन घंटे का स्क्रीन समय दिया जा सकता है।”
स्क्रीन टाइम के अलावा इस वेबिनार में साइबर सुरक्षा और आंखों पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा भी उठा।
मैक्स हेल्थकेयर में नेत्र रोग विभाग की प्रमुख और निदेशक पारुल शर्मा ने कहा कि स्क्रीन के साइज का असर पड़ता है। एक लैपटॉप या कंप्यूटर पर हाथ भर की दूरी से देखने के मुकाबले टेबलेट या मोबाइल पर करीब से कुछ देखने पर आखों पर ज्यादा जोर पड़ता है.
उन्होंने कहा कि इसके हानिकारक प्रभावों को कम करने के लिये नियमित अंतराल पर ब्रेक लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिये हम 10-10 या 20-20 का नियम अपना सकते हैं जहां हर 10 मिनट के बाद आपको अपनी आंखों को 10 सेकंड के लिये बंद रखने की कोशिश करनी चाहिए इसी तहर 20 मिनट तक काम करने के बाद अपनी आंखों को 20 सेकंड तक बंद रखें।
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