देश की खबरें | सोना तस्करी: निलंबित आईएएस अधिकारी को ईडी ने हिरासत में लिया, विपक्ष ने की विजयन के इस्तीफे की मांग
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

कोच्चि/तिरुवनंतपुरम, 28 अक्टूबर केरल सोना तस्करी मामले में जांच का सामना कर रहे निलंबित आईएएस अधिकारी एम शिवशंकर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को तिरुवनंतपुरम स्थित एक अस्पताल से हिरासत में ले लिया। वहीं, विपक्ष ने राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर दबाव बढ़ाते हुए इस मामले में उनके इस्तीफे की मांग की।

उच्च न्यायालय द्वारा शिवशंकर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज किये जाने के कुछ ही मिनट बाद ईडी के अधिकारियों का एक दल आयुर्वेद अस्पताल पहुंच, जहां मुख्यमंत्री विजयन के पूर्व प्रधान सचिव इलाज करा रहे थे। ईडी के अधिकारियों ने शिवशंकर को हिरासत में ले लिया।

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शिवशंकर को पूछताछ के लिए एक कार में कोच्चि स्थित प्रवर्तन निदेशालय के कार्यालय लाया गया।

शिवशंकर को तब हिरासत में लिया गया जब उच्च न्यायालय ने शिवशंकर द्वारा दायर दो अलग-अलग अग्रिम जमानत याचिकाओं पर आदेश पारित करते हुए उन्हें खारिज कर दिया। शिवशंकर ने ये अर्जियां मामले में तस्करी के कोण की जांच कर रहे सीमा शुल्क विभाग और ईडी द्वारा संभावित गिरफ्तारियों की आशंका में दायर की थीं। ईडी इस मामले में यह जांच कर रहा है कि धन कहां से आया और कहां गया।

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निलंबित आईएएस अधिकारी एम शिवशंकर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा हिरासत में लिये जाने के बाद कांग्रेस और भाजपा ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर पद छोड़ने का दबाव बढ़ा दिया।

विपक्षी दलों और उसकी युवा इकाइयों ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर तिरुवनंतपुरम स्थित सचिवालय के बारह सहित राज्य में विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन किये। प्रदर्शनकारियों ने कुछ स्थानों पर विजयन के पुतले भी फूंके।

उच्च न्यायालय ने ईडी मामले में शिवशंकर की अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि एजेंसी मामले में उनके द्वारा दिये गए बयानों के साथ ही मामले में मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश और उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा दिये गए बयानों पर भरोसा कर रही है।

इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि आईएएस अधिकारी आरोपी स्वप्नाा सुरेश के बहुत नजदीकी थे।

शिवशंकर ने स्वप्नाा सुरेश की जमा राशि के बारे में अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से चर्चा की थी।

न्यायमूर्ति अशोक मेनन ने अपने आदेश में कहा किया कि शिवशंकर ने स्व्प्ना सुरेश का परिचय चार्टर्ड अकाउंटेंट से कराया था और उनसे उसकी वित्तीय दिक्कतें दूर करने को कहा था ।

अदालत ने कहा कि अकाउंटेंट और आरोपी स्वप्नाा सुरेश द्वारा दिए गए बयानों से शिवशंकर की संलिप्तता के पुख्ता संकेत मिलते हैं।

अदालत ने कहा, ‘‘यह आरोप है कि आवेदक द्वारा दिए गए निर्देशों के परिणामस्वरूप स्वप्ना सुरेश और चार्टर्ड एकाउंटेंट (वेणुगोपाल) ने भारतीय स्टेट बैंक, तिरुवनंतपुरम शाखा में एक लॉकर खोला। दोनों को लॉकर संचालित करने का अधिकार था।’’

अदालत ने कहा, ‘‘भले ही आवेदक (शिवशंकर) ने लॉकर में राशि जमा करने से संबंधित गतिविधियों से खुद को अलग कर लिया हो, लेकिन उसके और चार्टर्ड एकाउंटेंट के बीच पत्राचार में स्वप्ना सुरेश के धन के प्रबंधन की देखरेख आवेदक द्वारा किये जाने के कुछ संकेत हैं।’’

ईडी के अभी तक आवेदक को आरोपी बनाने या अपराध में गवाह बनाना के संबंध में किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की बात पर गौर करते हुए अदालत ने कहा कि एजेंसी ने इस बात के पुख्ता संकेत दिए गए हैं कि आवेदक स्वप्ना सुरेश के साथ धनशोधन में शामिल व्यक्ति हो सकता है।

अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा, ‘‘संभवतः हो सकता है कि आवेदक को आरोपी बनाने के लिए फिलहाल ईडी द्वारा एकत्रित सबूत पर्याप्त नहीं हैं और इसके लिए भी पर्याप्त सबूत नहीं हों कि वह कथित अपराधों का दोषी है। लेकिन, उनके पास उनसे पूछताछ करने के लिए पर्याप्त सामग्री है, जिसके लिए वह एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के रूप में सहयोग करने के लिए बाध्य हैं।’’

सरकार के मामलों से जुड़े होने और इस हैसियत से यूएई के महावाणिज्य दूत की सचिव स्वप्ना सुरेश के साथ बातचीत करने की शिवशंकर की दलीलों को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि ‘‘यदि ऐसा है, तो उनके लिए उसके वित्त के प्रबंधन से संबंधित मामलों में हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं थी।’’

अदालत ने सोना तस्करी मामले में शिवशंकर की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि वह स्वप्ना सुरेश के लगातार संपर्क में थे और यहां तक कि अपने अकाउंटेंट से संपर्क करके उसकी मदद करने से संकेत मिलता है कि ऐसी संभावना है कि उन्हें स्वप्ना के ‘तस्करी गतिविधि’ में शामिल होने की जानकारी थी।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘क्या आवेदक खुद अपराध में सक्रिय रूप से शामिल था या नहीं, इसकी जांच की जानी चाहिए और पता लगाया जाना चाहिए।’’

उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि धारा 108 के तहत आवेदक से पूछताछ करने की सीमा शुल्क विभाग के अधिकार में अग्रिम जमानत देकर कटौती नहीं की जा सकती है। मांगी गई राहत निस्संदेह तौर पर समय से पहले है। इसलिए, मेरी राय है कि आवेदक अग्रिम जमानत का हकदार नहीं है।’’

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की।

उन्होंने कहा, ‘‘शिवशंकर को अब और सही ठहराए बिना, मुख्यमंत्री को पद से हट जाना चाहिए। वह मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) था, जिसने सोने की तस्करी के मामले में आरोपियों को बचाने के लिए सभी कदम उठाए।’’

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने संवाददाताओं से कहा कि अब यह स्पष्ट हो गया है कि सीएमओ ने सोना तस्करी के मामले में हस्तक्षेप किया।

सुरेंद्रन ने कहा, ‘‘जब एजेंसियां शिवशंकर से पूछताछ करेंगी, तो और जानकारी सामने आएगी। अदालत के आदेश से राज्य की वाम सरकार घिर गई है। जांच आगे बढ़ने पर मुख्यमंत्री और उनके कार्यालय की संलिप्तता स्पष्ट होगी।’’

इस बीच, कानून मंत्री ए के बालन ने कहा कि सरकार चाहती है कि सोना तस्करी मामले के सभी अपरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए और वह जांच में केंद्रीय एजेंसियों का सहयोग कर रही है।

बालन ने मीडिया से कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने आठ जुलाई को केंद्रीय एजेंसियों द्वारा व्यापक जांच के लिए कहा था। हम चाहते हैं कि कानून अपना काम करे। इसके अलावा, एजेंसियों ने राज्य सरकार के खिलाफ शिकायत नहीं की है क्योंकि हमने जांच के लिए उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान की है।’’

केंद्रीय एजेंसियां-राष्ट्रीय जांच एजेंसी, सीमा शुल्क विभाग और प्रवर्तन निदेशालय- पांच जुलाई को तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक ‘‘राजनयिक सामान’’ से लगभग 15 करोड़ रुपये के सोने की जब्ती की अलग-अलग जांच कर रही हैं।

केंद्रीय एजेंसियों ने इस मामले के सिलसिले में तिरुवनंतपुरम में यूएई वाणिज्य दूतावास के दो पूर्व कर्मचारियों, स्वप्ना सुरेश और सरित पी एस सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया है।

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