गुवाहाटी, 30 जनवरी सेना के पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल आर पी कलिता ने वर्ष 1894 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए अन्यायपूर्ण कर के खिलाफ हुए पथरुघाट विद्रोह में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद किसानों को सोमवार को श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने दरांग जिले के पथरुघाट में भारतीय सेना द्वारा शहीदों की याद में स्थापित स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित किया।
गौरतलब है कि 28 जनवरी 1894 को तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा भू-कर बढ़ाने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों पर बिना उकसावे के ब्रिटिश सैनिकों ने गोलीबारी की थी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस घटना में 15 लोगों की मौत हुई थी जबकि स्थानीय लोग यह संख्या करीब 140 बताते हैं। कुछ साल पहले स्थानीय पत्रकारों ने अपूर्ण सूची को संकलित किया था जिसमें उन 67 लोगों के नाम हैं जो इस गोलीकांड में मारे गए थे।
भारतीय सेना ने स्थानीय लोगों के सहयोग से स्मारक स्तंभ की स्थापना की जिसका उद्घाटन 28 जनवरी 2001 को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (अवकाश प्राप्त) एस के सिन्हा ने किया था, तब से सेना शहीद स्मारक पर इस दिन अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करती है।
शीर्ष सैन्य अधिकारी ने इस अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘ पथरुघाट असम के लोगों द्वारा देश के स्वतंत्रता संग्राम में किए गए सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ असम का समृद्ध और विविधतापूर्ण इतिहास है। यह किसान विद्रोह राज्य के इतिहास में विशिष्ट और खास स्थान रखता है।’’
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