नयी दिल्ली, नौ सितंबर जी20 शिखर सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध पर प्रमुख मतभेदों को दूर करते हुए शनिवार को सदस्यों देशों ने ‘नयी दिल्ली लीडर्स समिट डिक्लेरेशन’ को अपनाया जो भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कामयाबी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘‘वैश्विक विश्वास की कमी’’ को समाप्त करने का आह्वान किया।
इस मौके पर मोदी ने यह भी घोषणा की कि अफ्रीकी संघ को जी20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
जी20 देशों के घोषणापत्र में कहा गया कि आज का युग युद्ध का नहीं है और इसी के मद्देनजर घोषणापत्र में सभी देशों से क्षेत्रीय अखंडता तथा संप्रभुता सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों को बनाए रखने का आह्वान किया गया और यूक्रेन में शांति का मौहाल कायम करने की वकालत की गई।
घोषणापत्र में कहा गया है, ‘‘परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी देना अस्वीकार्य है।’’
प्रमुख विकसित और विकासशील देशों के समूह के दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के शुरुआती दिन दूसरे सत्र की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने 37 पृष्ठ के घोषणापत्र पर आम सहमति और उसके बाद इसे अपनाने की घोषणा की।
घोषणापत्र पर आम सहमति और उसके बाद इसे अपनाने की घोषणा भारत द्वारा यूक्रेन संघर्ष का वर्णन करने के लिए जी20 देशों को एक नया पाठ बांटने के कुछ घंटों बाद की गई।
मोदी ने शिखर सम्मेलन में नेताओं से कहा, ‘‘मित्रों, हमें अभी-अभी अच्छी खबर मिली है कि हमारी टीम की कड़ी मेहनत और आपके सहयोग के कारण, नयी दिल्ली जी20 लीडर्स समिट डिक्लेरेशन पर आम सहमति बन गई है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मैं घोषणा करता हूं कि इस घोषणापत्र को स्वीकार कर लिया गया है।’’
मोदी ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट में कहा, ‘‘नयी दिल्ली घोषणापत्र (नयी दिल्ली लीडर्स समिट डिक्लरेशन) अपनाने के साथ ही इतिहास रचा गया है। सर्वसम्मति और उत्साह के साथ एकजुट होकर हम एक बेहतर, अधिक समृद्ध और सामंजस्यपूर्ण भविष्य के लिए सहयोगात्मक रूप से काम करने का संकल्प लेते हैं। जी20 के सभी सदस्यों को उनके समर्थन और सहयोग के लिए आभार।’’
भारत की अध्यक्षता में शक्तिशाली जी20 समूह ने आतंकवाद के सभी रूपों की शनिवार को निंदा की और आतंकवादी समूहों को सुरक्षित पनाहगाह और भौतिक या राजनीतिक समर्थन से वंचित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।
घोषणा पत्र के अनुसार, ''हम मजबूत, टिकाऊ, संतुलित और समावेशी वृद्धि और अपने जलवायु उद्देश्यों को हासिल करने के साधन के रूप में विभिन्न मार्गों का अनुसरण करते हुए स्वच्छ, टिकाऊ, न्यायसंगत, सस्ते और समावेशी ऊर्जा संक्रमण में तेजी लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।''
जी20 समूह ने व्यक्तियों, धार्मिक प्रतीकों और पवित्र पुस्तकों के खिलाफ धार्मिक घृणा के सभी कृत्यों की कड़ी निंदा की।
घोषणापत्र को स्वीकार किया गया जिसमें उन्होंने धर्म या आस्था की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार पर जोर दिया।
जी20 शिखर सम्मेलन पर यूक्रेन विवाद की छाया के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने समूह के नेताओं का आह्वान किया कि वे मौजूदा ‘‘विश्वास की कमी’’ को दूर करें और अशांत वैश्विक अर्थव्यवस्था, आतंकवाद तथा खाद्य, ईंधन एवं उर्वरकों के प्रबंधन का ‘‘ठोस’’ समाधान सामूहिक रूप से निकालें।
मोदी ने शिखर सम्मेलन में अपने शुरुआती संबोधन में कहा कि जी20 के अध्यक्ष के तौर पर भारत ‘‘पूरी दुनिया को एक साथ आने और सबसे पहले वैश्विक विश्वास की कमी को वैश्विक विश्वास और भरोसे में बदलने के लिए आमंत्रित करता है’’।
भारत की जी20 की अध्यक्षता में अफ्रीकी संघ दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के समूह का स्थायी सदस्य बन गया। जी20 की स्थापना 1999 में की गई थी और इसके बाद से इस गुट में यह पहला विस्तार है।
मोदी ने दो दिवसीय जी20 शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए 55 देशों वाले अफ्रीकी संघ को नए सदस्य के तौर पर शामिल किए जाने का प्रस्ताव पेश किया जिसे सभी सदस्य देशों ने स्वीकार कर लिया।
मोदी ने कई बार इस बात पर जोर दिया है कि इस समूह को ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज भी सुननी चाहिए।
‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर विकासशील और अल्प विकसित देशों के लिए किया जाता है, जो मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में स्थित हैं।
मोदी ने 18वें जी20 शिखर सम्मेलन के ‘एक पृथ्वी’ सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यह वैश्विक कल्याण के लिए सभी के एक-साथ मिलकर चलने का समय है।’’
जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी सहित अन्य नेता भाग ले रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग शिखर सम्मेलन में शिरकत नहीं कर रहे हैं।
मोदी ने यहां ‘भारत मंडपम’ सम्मेलन केंद्र में सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘वैश्विक कोविड महामारी के बाद दुनिया ने विश्वास में कमी की नई चुनौती का सामना किया और दुर्भाग्य से, युद्धों ने इसे गहरा कर दिया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि यदि हम कोविड जैसी वैश्विक महामारी को हरा सकते हैं, तो हम विश्वास में कमी की इस चुनौती से भी पार पा सकते हैं। आज, भारत जी20 के अध्यक्ष के रूप में पूरी दुनिया से विश्वास की कमी को एक-दूसरे पर भरोसे में तब्दील करने की अपील करता है।’’
मोदी ने कहा, ‘‘अब समय आ गया है, जब पुरानी चुनौतियां हमसे नए समाधान चाहती हैं और इसीलिए हमें अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के वास्ते मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना होगा।’’
यूक्रेन संघर्ष के संबंध में नई दिल्ली घोषणापत्र में बाली दस्तावेज से अलग को लेकर जयशंकर ने कहा, ‘‘बाली, बाली था, नयी दिल्ली, दिल्ली है। बाली घोषणा के बाद से कई चीजें घटित हुई हैं।’’
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