देश की खबरें | जी20 शिखर सम्मेलन : वैश्विक नेताओं ने रात्रिभोज के दौरान उठाया भारतीय संगीत का आनंद

नयी दिल्ली, 10 सितंबर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जी20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने आए वैश्विक नेताओं के सम्मान में शनिवार को एक भव्य रात्रिभोज का आयोजन किया, जिसमें मेहमानों ने भारतीय व्यंजनों के साथ संगीत का भी लुत्फ उठाया।

संगीतकारों के एक समूह ने सुरसिंगार, मोहन वीणा, दिलरुबा और अन्य दुर्लभ भारतीय वाद्ययंत्र बजाए जिससे जी20 समूह के नेता मंत्रमुग्ध हो गए।

राष्ट्रपति मुर्मू ने शनिवार को शिखर सम्मेलन स्थल ‘भारत मंडपम’ में जी20 मेहमानों के लिए इस भव्य रात्रिभोज का आयोजन किया।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा, जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और कई अन्य देशों के नेता जी20 शिखर सम्मेलन के लिए यहां एकत्र हुए हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रात्रिभोज शुरू होने से पहले एक मंच पर अतिथियों का स्वागत किया, जिसकी पृष्ठभूमि में बिहार के नालंदा महाविहार (नालंदा विश्वविद्यालय) की तस्वीर लगी हुई थी, साथ ही भारत की अध्यक्षता में जी20 का विषय- 'वसुधैव कुटुम्बकम्- एक पृथ्वी, एक कुटुम्ब, एक भविष्य' को दर्शाया गया था।

नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यह विश्वविद्यालय दुनिया के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘ राष्ट्रपति द्वारा आयोजित भव्य रात्रिभोज में, भारत ने दुनिया के सामने अपनी विविध संगीत विरासत का प्रदर्शन किया। शास्त्रीय और समसामयिक संगीत की अलग-अलग शैलियां पेश करने वाले उत्कृष्ट वादकों और संगीतकारों के समूह ने यहां जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले वैश्विक नेताओं के लिए प्रस्तुति दी। ’’

इसका मुख्य आकर्षण 'गंधर्व अटोद्यम' समूह का प्रदर्शन था, जिसने 'भारत वाद्य दर्शनम' - भारत की संगीतमय यात्रा का प्रदर्शन किया।

शिखर सम्मेलन से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक यह संगीत कार्यक्रम एक अनोखा मिश्रण था, जिसमें कलाकारों ने सुरसिंगार, मोहन वीणा, जल तरंग, जोडिया पावा, धांगली और दिलरुबा सहित देश भर के दुर्लभ संगीत वाद्ययंत्रों को बजाया और उत्कृष्ट प्रस्तुति दी। इसमें हिंदुस्तानी, कर्नाटक, लोक और समकालीन संगीत का प्रदर्शन किया गया था।

देश की संगीत विरासत की समृद्ध परंपरा का जश्न मनाने के लिए संगीत नाटक अकादमी द्वारा इस कार्यक्रम की परिकल्पना की गई थी।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)