नयी दिल्ली, नौ सितंबर जी20 देशों ने शनिवार को कहा कि वे 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने का लक्ष्य रखेंगे और राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप निर्बाध रूप से कोयला से बनने वाली बिजली को चरणबद्ध तरीके से बंद करने के प्रयासों में तेजी लाएंगे।
इन देशों ने हालांकि तेल और गैस सहित सभी प्रदूषण फैलाने वाले जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से बंद करने के लिए प्रतिबद्धता नहीं जताई।
कोयले पर बयान इंडोनेशिया के बाली में पिछले जी20 शिखर सम्मेलन में हुई सहमति के अनुरूप है।
दुनिया के 85 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का योगदान देने वाले और 80 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार जी20 ने कहा कि वह अनुपयोगी जीवाश्म ईंधन सब्सिडी को खत्म करने तथा उसे तर्कसंगत बनाने के लिए 2009 में पिट्सबर्ग में किए गए अपने वादे को कायम रखेगा।
शुक्रवार को प्रकाशित पहली ‘ग्लोबल स्टॉकटेक’ की एक प्रमुख तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ाना और निर्बाध जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लिए ऊर्जा संक्रमण के अपरिहार्य तत्व हैं।
यहां जी20 शिखर सम्मेलन में जारी नेताओं की घोषणा में, समूह ने जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की छठी मूल्यांकन रिपोर्ट (एआर 6) के निष्कर्षों का उल्लेख किया कि पेरिस समझौते के तापमान लक्ष्यों को पूरा करने के लिए वैश्विक हरित गैस उत्सर्जन को 2020 से 2025 के बीच अपने उच्चतम बिंदु, या “चरम” तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने हालांकि कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि प्रत्येक देश को इस समय सीमा के भीतर अपने उत्सर्जन शिखर पर पहुंचना होगा।
घोषणापत्र में कहा गया है, “चरमोत्कर्ष की समय-सीमा सतत विकास, गरीबी उन्मूलन की जरूरतों, समानता और विभिन्न राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप तय की जा सकती है।”
दुनिया की कुछ सबसे धनी अर्थव्यवस्थाओं के समूह ने ‘2030 तक ऊर्जा दक्षता सुधार की दर को दोगुना करने पर स्वैच्छिक कार्य योजना’ पर भी ध्यान दिया।
नेताओं की घोषणा इस बात पर विचार करते हुए महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है कि जुलाई में जी20 के जलवायु और ऊर्जा मंत्री 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने और 2025 तक वैश्विक उत्सर्जन के चरम पर पहुंचने पर सहमत होने में विफल रहे थे।
भारत के जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने नेताओं की घोषणा को “जलवायु कार्रवाई पर संभवतः सबसे जीवंत, गतिशील और महत्वाकांक्षी दस्तावेज” कहा।
अगली संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता के अध्यक्ष सुल्तान अल जाबेर ने महत्वपूर्ण प्रगति के लिए जी20 की सराहना की।
उन्होंने कहा, “मैं 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा को तीन गुना करने की आज की गई प्रतिबद्धता के लिए विशेष रूप से आभारी हूं। ये 20 देश वैश्विक उत्सर्जन का 80 प्रतिशत हिस्सा हैं, इसलिए यह घोषणा जलवायु प्रगति के लिए एक शक्तिशाली संकेत भेजती है...।”
उन्होंने माना कि ‘ग्लोबल वार्मिंग’ को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए 2019 के स्तर के सापेक्ष 2030 तक वैश्विक हरित गैस उत्सर्जन में 43 प्रतिशत की तीव्र, गहरी और निरंतर कटौती की आवश्यकता है।
उन्होंने हालांकि “चिंता के साथ संज्ञान लिया” कि जलवायु परिवर्तन से निपटने और पेरिस समझौते में उल्लिखित तापमान उद्देश्यों को प्राप्त करने की वैश्विक महत्वाकांक्षा अपर्याप्त है।
जी20 ने कहा कि विकासशील देशों को अपनी राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए 2030 से पहले की अवधि में 5.9 हजार अरब अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होगी, जिसका लक्ष्य ग्लोबल वार्मिंग को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे, अधिमानतः 1.5 डिग्री सेल्सियस पर रखना है।
समूह ने कहा कि 2050 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन हासिल करने के लिए, विकासशील देशों को 2030 तक स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए सालाना लगभग चार हजार अरब अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होगी।
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