तिरुवनंतुरम, 17 जनवरी भारत ने जी-20 की अपनी अध्यक्षता में यहां होने वाली स्वास्थ्य र्कायकारी समूह की पहली बैठक से पहले मंगलवार को कहा कि वह सभी बहुपक्षीय वैश्विक स्वास्थ्य मंचों पर बातचीत के दौरान ‘ग्लोबल साउथ’ का प्रतिनिधित्व करने में सक्रिया भूमिका निभाएगा।
‘ग्लोबल साउथ’ का काफी हद तक आशय एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देशों से है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव लव अग्रवाल ने इस बात को रेखांकित किया कि एक उदार, जिम्मेदार और समग्र वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने और इसे गति देने के लिहाज से जी-20 सबसे महत्वपूर्ण मंचों में से एक है।
अग्रवाल ने कहा कि भारत का उद्देश्य स्वास्थ्य सहयोग के लिए कार्यरत विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर चर्चा के दौरान एकरूपता को हासिल करना और एकीकरण की दिशा में कार्य करना है।
जी-20 की भारतीय अध्यक्षता के तहत पहले स्वास्थ्य कार्यकारी समूह की बैठक यहां 18 से 20 जनवरी तक होगी। भारत ने जी-20 की अध्यक्षता एक दिसंबर 2022 को हासिल की।
इस बैठक में जी-20 के सदस्य देशों के प्रतिनिधि, विशेष अतिथि देश और कई प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल होंगे।
भारत फिलहाल जी-20 ट्रोइका (त्रिगुट) का हिस्सा है जिसमें इंडोनेशिया और ब्राजील भी शमिल हैं। ये तीनों देश जी-20 के पूर्व, भावी या मौजूदा अध्यक्ष देश हैं।
अग्रवाल ने कहा कि यह पहली बार है कि ट्रोइका में तीन विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं।
अग्रवाल ने कहा कि भारत के पास एक असाधारण अवसर है कि वह विश्व की कुछ साझा विकास संबंधी चुनौतियों को दूर करे और ‘ग्लोबल साउथ की आवाज’ बनकर उभरे।
उन्होंने कहा कि भारत को ‘विश्व की फॉर्मेसी’ की रूप में जाना जाता है और देश कार्यकारी समूह के एजेंडा के अनुरूप वैश्विक स्तर पर टीकों और दवाओं के विस्तारित विनिर्माण समेत निदान को प्रोत्साहित करने में सक्षम होगा।
बैठकें देशभर में विभिन्न स्थानों पर आयोजित की जाएंगी जिसमें तिरुवनंतपुरम, गोवा, हैदराबाद, गांधीनगर शामिल हैं।
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