देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की पूर्ण संख्या अपवाद नहीं, नियमित व्यवस्था होनी चाहिए: सीजेआई

नयी दिल्ली, 15 अप्रैल भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी. वाई. चंद्रचूड़ ने कहा है कि न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या के साथ शीर्ष अदालत का संचालन कोई ‘अपवाद’ वाली बात नहीं, बल्कि एक ‘नियमित व्यवस्था’ होनी चाहिए।

उन्होंने सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग (सीआरपी) नामक आंतरिक थिंक टैंक’ से कहा कि वह भविष्य के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में चयन के लिए देश के शीर्ष 50 न्यायाधीशों का डेटा एकत्र करे।

न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार के 13 फरवरी को शपथ लेने के बाद शीर्ष अदालत में सीजेआई सहित न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 हो गई, जो इस न्यायालय में न्यायाधीशों की अधिकतम स्वीकृत संख्या है।

सीआरपी की स्थापना 2018 में तत्कालीन सीजेआई न्यायमूर्ति रंजन गोगोई द्वारा की गई थी, ताकि शीर्ष अदालत के ज्ञान के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके।

सीजेआई हाल ही में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की ओर से न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति पंकज मिथल, न्यायमूर्ति संजय करोल, न्यायमूर्ति संजय कुमार, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार को सम्मानित करने के लिए आयोजित एक समारोह में बोल रहे थे।

शीर्ष अदालत से इस साल छह न्यायाधीश सेवानिवृत्त होंगे।

सीजेआई ने कहा, “कॉलेजियम के लिए शीर्ष अदालत में एक भी पद खाली रखने का कोई औचित्य या कारण नहीं है और भविष्य के लिए भी यही मेरा मिशन होगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय के भविष्य के न्यायाधीशों के तौर पर चयन के लिए देश के शीर्ष 50 न्यायाधीशों का डेटा एकत्र करने का सीआरपी को निर्देश दिया गया है।

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