नयी दिल्ली, 13 जुलाई कपड़ा निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) ने सोमवार को कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, आस्ट्रेलिया और कनाडा के साथ मुक्त व्यापार समझौते के क्रियान्वयन से देश से अगले तीन साल में कपड़ा निर्यात दोगुना हो जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में एईपीसी के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने कहा कि देश के प्रमुख निर्यात बाजार अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में कोविड-19 महामारी के कारण उद्योग पर प्रतिकूल असर पड़ा है। ऐसे में इन क्षेत्रों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से क्षेत्र को गति मिलेगी।
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उन्होंने पत्र में कहा, ‘‘हालांकि सरकार निर्यात को गति देने के लिये कदम उठा रही है, लेकिन एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो आपके प्रयासों को और गति दे सकती है। वह है त्वरित उपायों के माध्यम से यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, अमेरिका, आस्ट्रेलिया और कनाडा के साथ भारत के व्यापार समझौतों की व्यापक समीक्षा के जरिये निर्यात की प्रतिस्पर्धा क्षमता में इजाफा।’’
शक्तिवेल ने कहा कि फिलहाल भारत को बांग्लादेश, कम्बोडिया, श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले यूरोपीय संघ के बाजार में 9.6 प्रतिशत का शुल्क का नुकसान है।
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उन्होंने कहा कि हाल में वियतनाम ने यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया किया है और ज्यादातर प्रतिस्पर्धी देश अपनी लागत प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाकर एफटीए का बड़े पैमाने पर लाभ उठा रहे हैं।
शक्तिवेल ने कहा, ‘‘बाजार पहुंच और मार्जिन ऑफ प्रीफरेंस (सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र के अंतर्गत दिये गये शुल्क और तरजीही व्यवस्था के तहत शुल्क भुगतान का अंतर) के संदर्भ में बड़े वैश्विक बाजार में समान अवसर की तत्काल जरूरत है। साथ ही उस विसंगतियों को दूर करने की जरूरत है जिसका हम सामना कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ समझौते से भारत के कपड़ा निर्यात पर उल्लेखनीय प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल औसत शुल्क 12.5 प्रतिशत है और मानव निर्मित फाइबर से बने कपड़े जैसे कुछ चीजों पर शुल्क 28 प्रतिशत तक है।
भारत के लिये अमेरिका कपड़ा निर्यात का प्रमुख गंतव्य है। उसकी कुल निर्यात में हिस्सेदारी 27 प्रतिशत है।
परिषद ने कनाडा और आस्ट्रेलिया के साथ भी व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता पर जोर दिया है।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार यूरोपीय संघ, आस्ट्रेलिया और कनाडा के साथ एफटीए पर अलग-अलग बातचीत कर रही है। साथ ही अमेरिका के साथ सीमित व्यापार समझौते पर बातचीत हो रही है।
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