मैक्रों ने विस्तार से बताया कि कैसे फ्रांस नरसंहार के 800,000 पीड़ितों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा लेकिन उन्होंने इसके लिए कोई माफी नहीं मांगी।
फ्रांसीसी नेता ने राजधानी किगाली में नरसंहार स्मारक पर बृहस्पतिवार को कहा कि फ्रांस नरसंहार में ‘‘सहयोगी नहीं था’’ लेकिन उसने रवांडा के ‘‘नरसंहार शासन’’ का पक्ष लिया और इसलिए उस पर इसकी भारी जिम्मेदारी है।
मैक्रों ने कहा, ‘‘फ्रांस की रवांडा में एक भूमिका, एक इतिहास और एक राजनीतिक जिम्मेदारी है। सच जानने के बावजूद लंबे वक्त तक चुप रहकर रवांडा के लोगों को दी पीड़ा को पहचानना भी एक कर्तव्य है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब नरसंहार शुरू हुआ तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस पर प्रतिक्रिया जताने में तीन महीने का वक्त लगा और हम सभी ने हजारों पीड़ितों को बेसहारा छोड़ दिया।’’
उन्होंने कहा कि फ्रांस की नाकामी से दोनों देशों के बीच ‘‘27 साल तक दूरियां’’ रही।
मैक्रों ने कहा, ‘‘मैं यहां पर हमारी जिम्मेदारी लेने के लिए आया हूं।’’
मैक्रों ने हालांकि माफी नहीं मांगी लेकिन रवांडा के राष्ट्रपति पॉल कगामे ने फ्रांस के राष्ट्रपति की उनकी ‘‘शक्तिशाली भाषण’’ के लिए प्रशंसा की। कगामे ने कहा, ‘‘उनके शब्द एक माफी से कही अधिक मूल्यवान हैं, ये सच्चाई है। यह अत्यंत साहसी कृत्य है।’’
मैक्रों ने कहा कि वह रवांडा के लिए कोरोना वायरस रोधी 100,000 टीके लेकर आये हैं।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति बृहस्पतिवार तड़के किगाली पहुंचे और उन्होंने राष्ट्रपति आवास में राष्ट्रपति पॉल कगामे से मुलाकात की।
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