नयी दिल्ली, आठ जुलाई ट्विटर इंक ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि उसमें सार्वजनिक कार्यक्रम निहित नहीं है और ‘‘ बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी संयोगवश उसके ’’ उपयोगकर्ताओं के साथ संविदा अधारित संबंध में निहित है।
वरिष्ठ अधिवक्ता का माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर अकाउंट निलंबित करने के संबंध में अदालत में जवाब दाखिल करते हुए ट्विटर ने कहा , ‘‘टि्वटर मंच पर सेवाएं संविदा आधारित संबंध है’’और ‘‘ यह वाणिज्यिक प्रतिष्ठान है जो संयोगवश बोलने और अभिव्यक्ति की सेवा भी देता है और कार्य करने की प्रकृति को बदल नहीं सकता।’’
ट्विटर ने कहा, ‘‘ सार्वजनिक प्रकृति की असत्यापित गतिविधिया के आधार पर प्रतिवादी संख्या-दो (ट्विटर) के बारे में नहीं कहा जा सकता कि सार्वजनिक कार्यक्रम उसमें निहित है...।’’
ट्विटर ने कहा कि चूंकि वह कुछ नियम और शर्तों के आधार पर संविदा आधारित सेवा उपयोगकर्ताओं को देता है, किसी भी विवाद के समाधान के लिए मामला साधारण अदालत में जाना चाहिए न कि उच्च न्यायालय के रिट न्यायाधिकारक्षेत्र में।
उल्लेखनीय है कि वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने दिसंबर 2019 में रिट याचिका दायर की। उन्होंने यह याचिका दो पोस्ट को रीट्वीट करने पर ट्विटर द्वारा उनका अकाउंट स्थाई रूप से निलंबित करने पर दायर की।
ट्विटर ने अपने जवाब में दावा किया कि हेगड़े की याचिका स्वीकार करने योग्य नहीं है। अपने जवाब में कंपनी ने कहा कि हेगड़े का अकांउट स्थगित करना संविदा विवाद है और उनको सेवा देने की बाध्यता नहीं है।
अधिवक्ता प्रांजल किशोर के जरिये दायर याचिका में हेगड़े ने सवाल किया है कि क्या ट्विटर जैसी बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी अपने कार्यों के लिए संवैधानिक समीक्षा के लिए उत्तरदायी नहीं है।
ट्विटर ने दावा किया है कि संजय हेगड़े की याचिका विचार योग्य नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए।
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