देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ने एससीबीए सचिव के निलंबन को ‘अवैध’ बताया
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नयी दिल्ली, 31 मई उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति पीबी सावंत ने कार्यकारी समिति द्वारा वकील अशोक अरोड़ा को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के सचिव के पद से निलंबित किए जाने को "अवैध" और "नैतिक रूप से अत्याचार" करार दिया है। बार के निलंबित अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।

एससीबीए अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे तथा अरोड़ा के बीच विवाद चल रहा है। अरोड़ा को आठ मई को बार निकाय के सचिव पद से निलंबित कर दिया गया था।

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निलंबन के दो दिन बाद घटनाक्रम में नया मोड़ आया जब शीर्ष बार निकाय बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अरोड़ा के ज्ञापन पर गौर किया और एससीबीए सचिव के पद से उनके निलंबन को "अवैध, अलोकतांत्रिक और निरंकुश" करार देते हुए उसपर रोक लगा दी।

अरोड़ा ने 95 वर्षीय पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सावंत को एससीबीए और उनके निलंबन के बारे में लिखा था। अरोड़ा ने पूर्व न्यायाधीश द्वारा उन्हें भेजा गया ई-मेल रविवार को साझा किया।

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अरोड़ा को भेजे अपने ई-मेल में न्यायमूर्ति सावंत ने कहा कि कार्यकारी समिति की कार्रवाई न केवल अवैध है, बल्कि अपरिपक्व और नैतिक रूप से अत्याचार भी है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सही सलाह दी है और आपको (अरोड़ा को) इसका पालन करना चाहिए।

अरोड़ा ने बंबई उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति कोलसे पाटिल की प्रतिक्रिया को भी मीडिया के साथ साझा किया, जिसमें उन्होंने निलंबन का विरोध किया है।

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