लखनऊ, 28 फरवरी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) नेता एवं पूर्व विधायक शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली बुधवार को समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल हो गये।
माना जाता है कि आजमगढ़ की मुबारकपुर सीट से दो बार बसपा विधायक (2012 और 2017 में) रह चुके जमाली की जिले में अच्छी पकड़ है और उन्होंने 2014 और 2022 का लोकसभा उपचुनाव क्रमशः सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव और धर्मेंद्र यादव के खिलाफ बसपा के टिकट पर लड़ा था।
सपा ने अभी तक आजमगढ़ सीट पर कोई उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। धर्मेंद्र यादव को आजमगढ़ और कन्नौज सीट का प्रभारी बनाया है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शाह आलम का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा, ‘‘ वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले गुड्डू जमाली मेरे पास आए थे लेकिन किन्हीं परिस्थितियों की वजह से उनका साथ नहीं मिल पाया लेकिन आज जब हम लोग 2024 में भविष्य की लड़ाई लड़ने जा रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ वह आए नहीं है बल्कि मैंने उन्हें अपने पास बुलाया है। इस पार्टी में रहकर भी आपको अपने घर जैसा लगेगा कि आप अपनी पार्टी में वापस आए हैं।’’
सपा महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने इस मौके पर कहा कि शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली और उनके साथी हमेशा के लिए हमारे साथ हो गए हैं और उनका सदैव सम्मान रहेगा।
इस अवसर पर गुड्डू जमाली ने कहा कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा की बात सुनकर सपा का दामन थामा है।
उन्होंने कहा, ‘‘ आज देश जिन परिस्थितियों में खड़ा हुआ है, हमारे सामने दो ही विकल्प हैं। एक खेमा वह है जो इस देश को तोड़ना चाहता है और दूसरा वह जो इसे जोड़ना चाहता है।’’
जमाली ने कहा, ‘‘ मैंने सपा में आने का फैसला किसी लालच में नहीं किया बल्कि दिल दिमाग से यह समझा कि देश के गंभीर नागरिक होने के नाते हमारी क्या जिम्मेदारी है लिहाजा मेरे दिल ने इस बात को कहा कि यकीनन हमें ऐसे लोगों के साथ खड़े होना चाहिए जो इस भाईचारे को बचाने के लिए लड़ रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि अगर इस देश में कुछ बदलाव हो सकता है तो यहीं (सपा) पर उम्मीद है।
उन्होंने कहा, ‘‘ आज के बाद हम पूरी जिंदगी आपके (सपा के) साथ हैं और मैं इस मंच से कह रहा हूं कि चाहे यहां मुझे कुछ मिले या न मिले मैं पूरी जिंदगी आपका वफादार रहूंगा।’’
वर्ष 2002 में करहल विधानसभा सीट से अखिलेश यादव की जीत और आजमगढ़ सीट छोड़ने के बाद हुए उपचुनाव में जमाली को 2,66,210 वोट मिले थे और वह तीसरे स्थान पर रहे थे। उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के दिनेश लाल यादव निरहुआ ने 3,12,786 मत के साथ जीत हासिल की थी जबकि सपा के धर्मेंद्र यादव को 3,04,089 वोट मिले थे।
ऐसा माना जाता है कि जमाली ने क्षेत्र में सपा के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा दी थी इसीलिये यादव चुनाव हार गये थे।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी जमाली को 2.66 लाख से ज्यादा वोट मिले थे और वह तीसरे स्थान पर रहे थे, जबकि सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव को 3,40306 वोट मिले थे और उन्होंने सीट जीती थी।
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