देश की खबरें | पत्रकार प्रिया रमानी को बरी करने के खिलाफ पूर्व मंत्री अकबर की अपील पर अप्रैल में होगी सुनवाई

नयी दिल्ली, 23 फरवरी मानहानि के मामले में पत्रकार प्रिया रमानी को बरी करने के खिलाफ पूर्व केंद्रीय मंत्री एम जे अकबर की अपील पर दिल्ली उच्च न्यायालय 26 अप्रैल को सुनवाई करेगा।

उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को अकबर द्वारा दायर उस याचिका को स्वीकार कर लिया जिसमें निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी अपील पर जल्द सुनवाई की मांग की गई थी।

पत्रकार प्रिया रमानी की ओर से लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों पर अकबर द्वारा दायर आपराधिक मानहानि के मामले में निचली अदालत ने रमानी को बरी कर दिया था।

न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने मामलों की मुख्य सूची में अपील को 26 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। जनवरी 2022 में अपील स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय ने इसे बिना कोई विशिष्ट तारीख बताए, उचित समय पर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था।

अकबर ने अपने आवेदन में कहा है कि वह एक वरिष्ठ नागरिक और वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्होंने कहा है कि अपील दायर किए हुए दो साल बीत चुके हैं और उन्होंने अदालत से शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया।

इस मामले में अकबर का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील राजीव नायर ने कहा कि निचली अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले में मानहानि का निष्कर्ष उनके मुवक्किल के पक्ष में था।

रमानी की ओर से पेश वकील ने कहा कि अपील की शीघ्र सुनवाई के लिए आवेदन में उल्लिखित एकमात्र आधार यह है कि अकबर अब भी 2018 में हुई कथित मानहानि से व्यथित हैं, जिसके लिए रमानी पहले ही मुकदमे का सामना कर चुकी हैं और निचली अदालत द्वारा उन्हें बरी कर दिया गया है।

रमानी ने वर्ष 2018 में ‘मीटू’ आंदोलन के मद्देनजर अकबर के खिलाफ यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। अकबर ने 15 अक्टूबर, 2018 को रमानी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अकबर ने अपनी शिकायत में कहा था कि रमानी दशकों पहले यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाकर उन्हें बदनाम कर रही हैं। इसके बाद अकबर ने 17 अक्टूबर, 2018 को केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

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