विदेश की खबरें | विदेश सचिव क्वात्रा ने श्रीलंकाई विदेश मंत्री से मुलाकात की, विक्रमसिंघे के भारत दौरे पर हुई चर्चा
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

कोलंबो, 11 जुलाई भारत के विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने मंगलवार को श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों तथा राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की आगामी भारत यात्रा पर चर्चा की।

क्वात्रा कई भारतीय परियोजनाओं का जायजा लेने और अगले सप्ताह श्रीलंकाई राष्ट्रपति विक्रमसिंघे की भारत यात्रा के लिए जमीन तैयार करने के वास्ते दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सोमवार रात यहां पहुंचे।

श्रीलंकाई विदेश मंत्री ने एक ट्वीट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर विक्रमसिंघे की आगामी भारत यात्रा पर उन्होंने भारतीय विदेश सचिव के साथ चर्चा की।

ट्वीट में उन्होंने कहा, “चर्चा हमारे लोगों के पारस्परिक लाभ के लिए दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर भी केंद्रित थी।”

इससे पहले क्वात्रा ने अपने श्रीलंकाई समकक्ष अरुणि विजेवर्धने से भी मुलाकात कर चर्चा की।

अधिकारियों ने कहा कि क्वात्रा कई क्षेत्रों में पाइपलाइन में चल रही कई भारतीय परियोजनाओं का आकलन करेंगे और विक्रमसिंघे की भारत यात्रा के लिए जमीन तैयार करेंगे।

अधिकारियों ने रविवार को यहां बताया कि विक्रमसिंघे 21 जुलाई को भारत की दो दिवसीय यात्रा पर रवाना होंगे और इस दौरान उनके मोदी से मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि विक्रमसिंघे नई दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले द्वीपीय राष्ट्र में बिजली और ऊर्जा, कृषि व समुद्री मुद्दों से संबंधित कई भारतीय परियोजनाओं के कार्यान्वयन को अंतिम रूप देंगे।

पिछले वर्ष जुलाई में जनता के विद्रोह के बीच गोटबाया राजपक्षे के सत्ता से बाहर होने और सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहे देश का राष्ट्रपति नियुक्त होने के बाद यह विक्रमसिंघे की पहली भारत यात्रा होगी।

विक्रमसिंघे ने भारत के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने पर जोर दिया है और इसे अपनी विदेश नीति का प्रमुख हिस्सा बनाया है।

इस साल जनवरी में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विक्रमसिंघे को भारत आने का औपचारिक निमंत्रण दिया था।

यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब श्रीलंका की कमजोर अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिख रहे हैं।

विदेशी मुद्रा की भारी कमी के कारण श्रीलंका 2022 में वित्तीय संकट की चपेट में आ गया था। उसे 1948 में ब्रिटिश हुकूमत से आजादी के बाद सबसे बड़े आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

द्वीप राष्ट्र ने पिछले साल अप्रैल के मध्य में पहली बार कर्ज अदा न कर पाने की घोषणा की थी। इस साल मार्च में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने उसे 2.9 अरब अमेरिकी डॉलर का राहत पैकेज दिया था।

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