देश की खबरें | प्रकाश सिंह बादल के लिये, शिअद-भाजपा का गठबंधन था ‘नउ-मास दा रिश्ता’

चंडीगढ़, 26 अप्रैल केंद्र के अब रद्द किए गए कृषि कानूनों को लेकर अपनी पार्टी के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से बाहर निकलने से पहले, अकाली दल के दिग्गज नेता प्रकाश सिंह बादल शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन को “नउ-मास दा रिश्ता” (नाखून और त्वचा) कहते थे।

प्रकाश सिंह बादल को सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद 16 अप्रैल को पंजाब के मोहाली में फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मंगलवार को 95 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।

ऐसा नहीं था कि दो पूर्व सहयोगी दलों के बीच अन्य मुद्दों पर मतभेद नहीं थे लेकिन प्रकाश सिंह बादल ने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि ये सौहार्दपूर्ण ढंग से हल हो जाएं और रिश्ते बरकरार रहें।

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) 1997 से भाजपा के नेतृत्व वाले राजग का हिस्सा था। शिअद और भाजपा ने 1997 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव पूर्व गठबंधन किया, जो बाद में दो दशकों तक जारी रहा।

पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए दोनों पूर्व सहयोगियों द्वारा सहमत व्यवस्था के अनुसार, 117 सदस्यीय विधानसभा में शिअद 94 सीटों पर चुनाव लड़ती थी जबकि शेष 23 सीटों पर भाजपा चुनाव लड़ती थी।

लोकसभा में भाजपा 13 संसदीय क्षेत्रों में से दो सीटों पर चुनाव लड़ती थी। यह व्यवस्था 2019 तक जारी रही।

शिअद ने हालांकि 26 सितंबर 2020 को दो दशक से अधिक लंबे संबंधों को तोड़ दिया और विवादास्पद कृषि विधेयकों पर राजग का साथ छोड़ दिया। पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कोर कमेटी की बैठक आयोजित करने के बाद यह घोषणा की।

प्रकाश सिंह बादल के बेटे सुखबीर सिंह बादल ने तब कहा था कि अकाली दल भाजपा का सबसे पुराना सहयोगी है, लेकिन केंद्र सरकार ने किसानों की भावनाओं का सम्मान करने के लिए उसकी एक नहीं सुनी।

दोनों दलों ने 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा और दोनों को ही अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा। चुनावों में भाजपा को सिर्फ दो सीटों पर जीत मिली जबकि शिअद केवल तीन सीटों पर सिमट गया।

कृषि कानूनों के अलावा, अन्य मुद्दे भी थे जो गठबंधन पर दबाव डालते थे, हालांकि, प्रकाश सिंह बादल ने हमेशा मामलों का सौहार्दपूर्ण ढंग से हल निकालने को प्राथमिकता दी।

जब अकाली-भाजपा गठबंधन 2007 से 2012 तक सत्ता में था, तब भाजपा की राज्य इकाई ने उपमुख्यमंत्री पद की मांग की थी, जिसे वरिष्ठ सहयोगी ने ठुकरा दिया था।

पंजाब में गठबंधन शासन का हिस्सा रही भाजपा ने जनवरी 2013 में 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार में मारे गए लोगों के लिए एक स्मारक के निर्माण का विरोध किया। स्मारक स्वर्ण मंदिर परिसर की संगमरमर की परिधि के पास बनाया गया था।

इसके अलावा भी अन्य कई मुद्दों पर दोनों दलों के बीच मतभेद देखने को मिले पर प्रकाश सिंह बादल के चूंकि भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ अच्छे संबंध थे इसलिए इन सभी मुद्दों को सुलझा लिया गया।

बादल के कई भाजपा नेताओं के साथ अच्छे संबंध थे, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी शामिल थे। नरेन्द्र मोदी के 2014 में प्रधानमंत्री बनने से बहुत पहले से बादल के उनसे भी अच्छे संबंध थे।

सितंबर 2013 में प्रकाश सिंह बादल ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और भाजपा की चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष मोदी को देश का “महानतम नेता” कहा था।

बादल प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में मोदी के समर्थन में आने वाले भाजपा के पहले सहयोगी थे।

मोदी ने 2015 में बादल को ‘भारत का नेल्सन मंडेला’ कहा था जिन्होंने इतने साल जेल में बिताए हैं और वह भी राजनीतिक कारणों से।

मोदी ने 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान वाराणसी से अपना नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए जाने से पहले बादल के पैर भी छुए थे।

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