गोपेश्वर, 17 मई उत्तराखंड के 13 में से पांच पहाडी जिले अभी तक कोविड-19 के संक्रमण से दूर रहे हैं जिसका श्रेय स्थानीय प्रशासन और लोगों में जागरूकता के अलावा भौगोलिक स्थिति और जलवायु को भी दिया जा रहा है ।
गढ़वाल क्षेत्र के चमोली और रूद्रप्रयाग तथा कुमाऊं के बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चम्पावत जिलों में कोरोना महामारी के दो माह से भी अधिक समय बाद भी स्थिति अभी काबू में है ।
इन जिलों में कोरोना संक्रमण की रोकथाम में लगे कर्मियों के प्रशिक्षण और जनप्रतिनिधियों के जागरूकता स्तर को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक ढंग से बेहतरीन कार्यक्रम चलाये गये । इसके अलावा, राज्य में बाहर से आने वाले लगभग हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य पृथक-वास की व्यवस्था की गयी ।
रूद्रप्रयाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा.एस.के.झा कहते हैं, ‘‘ हमने शुरूआत से ही कर्मिकों के प्रशिक्षण, संक्रमण-रोधन और जिले में प्रवेशकर्ताओं के लिए अनिवार्य पृथक-वास को सख्ती से लागू किया । सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ ग्राम प्रधानों और स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं की प्रशिक्षित टीम भी तैयार की गई जिससे कोरोना के संक्रमण को अब तक दूर रखने में सहायता मिली ।’’
इन जिलों के संक्रमण मुक्त रहने पर बदरीनाथ के विधायक महेन्द्र प्रसाद भट्ट प्रशासनिक कार्यप्रणाली के साथ ही लोगों की जागरूकता को भी इसका श्रेय देते हुए कहते हैं,‘‘ स्थानीय प्रशासन केन्द्र और राज्य से मिल रहे निर्देशों के साथ स्थानीय जरूरतों से तालमेल बैठाते हुए कार्य कर रहा है जिससे अभी तक संक्रमण को रोकने में सफलता मिली है ।’’
दूसरी ओर, संक्रमण मुक्त रहने के लिए स्थानीय परिवेश, पर्यावरण, जलवायु और पारिस्थितकीय तंत्र जैसे कारकों को भी इसका श्रेय दिया जा रहा है।
नन्दा देवी राजजात समिति के उपाध्यक्ष रह चुके एडवोकेट भुवन नौटियाल ने कहा, ‘‘ चीन की सीमा से लगे होने के बाद भी हमारे जिलों के कोरोना संक्रमण से मुक्त रहने के पीछे यहां का सुरक्षित पारिस्थितिकीय तंत्र भी कारण है। यहां हरियाली और साफ आबोहवा होने के कारण यहां के लोगों की प्रतिरोधक क्षमता अन्य इलाकों के मुकाबले उच्च स्तर की है ।’’
सामाजिक कार्यकर्ता रमेश पहाड़ी भी इस बात पर जोर देते हुए कहते हैं, ‘‘पहाड़ी और सीमान्त जिलों में आबादी का घनत्व कम है, लोग भोजन सादा और पर्याप्त श्रम करते हैं जिससे पाचन तंत्र भी ठीक रहता है और इसलिए लोगों की सामान्य प्रतिरक्षण क्षमता भी अधिक है।’
हालांकि, इन जिलों को कोविड-19 के संक्रमण से मुक्त रहने के लिए अब अधिक से अधिक सैम्पलिंग की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है और ऐसा मानना है कि इस स्तर पर ढील होने से पिछली दो महीनों की मेहनत पर पानी फिर सकता है ।
दस साल तक गोपेश्वर चमोली नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष रहे प्रेमबल्लभ भट्ट ने कहा, ‘‘चार लाख की आबादी वाले चमोली जिले में पिछले दो महीने में पचास से भी कम सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। अब प्रवासी भी लौट रहे हैं और ऐसे में ज्यादा सैम्पलिंग की प्रक्रिया शुरू होने तक इस बारे में प्रमाणिकता से साथ कुछ नहीं कहा जा सकता है।’’
रूद्रप्रयाग सीएमओ डा झा ने कहा, ‘‘ मई के पहले सप्ताह से लेकर अब तक बारह हजार से अधिक लोग रूद्रप्रयाग जिले में आए हैं । आगे भी इतने ही लोगों के और लौटने की संभावना है। इसके लिए हमने पूरी तैयारी की है और हमारा पूरा नेटवर्क हाई अलर्ट पर है ।'
चमोली जिले में भी तीन मई से लेकर अब तक 11,000 से अधिक लोग बाहरी राज्यों या अन्य जिलों से आये हैं।
सं दीप्ति
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