मुंबई, 15 मई महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने सोमवार को कहा कि 11 मई के उच्चतम न्यायालय के आदेश के मद्देनजर पहले वह यह पहचानेंगे कि शिवसेना का कौनसा धड़ा राजनीतिक दल है, इसके बाद किसी अन्य फैसले पर आगे बढ़ेंगे।
वह लंदन से लौटने के बाद यहां पत्रकारों से बात कर रहे थे।
नार्वेकर ने कहा, “मुझे पहले यह पहचानना होगा कि विधानसभा में राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व कौन करता है। इसके बाद मुख्य सचेतक की नियुक्ति पर फैसला लिया जाएगा। विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिकाएं अध्यक्ष के पास लंबित हैं। उनका मुख्य विवाद सचेतक के आदेश का पालन नहीं करने को लेकर है।”
पिछले साल शिवसेना में टकराव के बाद महाराष्ट्र में महा विकास आघाड़ी की सरकार गिर गई थी। इससे संबंधित मामले पर 11 मई को अपने फैसले में उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि वह तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को बहाल नहीं कर सकता क्योंकि उन्होंने शक्ति परीक्षण के बिना इस्तीफा देने का फैसला किया था।
शीर्ष अदालत ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत शिवसेना के 16 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने से इनकार करते हुए कहा था कि वह आमतौर पर दलबदल रोधी कानून के तहत अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर फैसला नहीं कर सकती।
अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष नार्वेकर को इस लंबित मामले पर “उचित अवधि” के अंदर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
नार्वेकर ने कहा, “ हमें यहां पूर्वव्यापी प्रभाव से निर्णय लेना है। उसके लिए, मुझे दोनों पक्षों और उनके प्रतिवेदन के साथ सुनवाई करने की आवश्यकता है।”
शिंदे और ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना के दोनों समूहों ने अलग-अलग दलों के रूप में चुनाव लड़ा है, लेकिन उन्हें विधानसभा में अलग से मान्यता नहीं मिली है।
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