नयी दिल्ली, 25 सितंबर केंद्र सरकार ने शुक्रवार को रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) ट्रेन की पहली झलक पेश की, जिसकी डिजाइन दिल्ली के प्रतिष्ठित 'लोटस टैम्पल' (कमल मंदिर) से प्रेरित है।
यह ट्रेन दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ गलियारे पर अधिकतम 180 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से दौड़ सकेगी।
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केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने कहा कि ट्रेन का बाहरी हिस्सा स्टील से बना होगा और यह वजन में भी हल्की होगी। साथ ही पूरी ट्रेन वातानुकूलित होगी।
मंत्रालय ने कहा कि ट्रेन को कुछ इस तरह डिजाइन किया गया है कि प्राकृतिक रोशनी और ऊर्जा इसमें पहुंचेगी।
इस ट्रेन के सभी डिब्बों में छह स्वाचालित दरवाजें भी होंगे। यात्री आसानी से चढ़ और उतर सकें, इसके लिए प्रत्येक तरफ तीन दरवाजों की सुविधा दी जाएगी।
हालांकि, 'बिजनेस क्लास' के डिब्बों में ऐसे चार दरवाजे होंगे।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) के एक अधिकारी ने दावा किया कि आरआरटीएस ट्रेनें दिल्ली मेट्रो की तुलना में तीन गुना अधिक रफ्तार से दौड़ेंगी।
अधिकारी ने कहा, ‘‘आरआरटीएस ट्रेनों में बिजनेस क्लास (हर ट्रेन में एक डिब्बा) भी होगा, जिसमें चौड़ी और आरामदायक सीटें होंगी।’’
उन्होंने कहा कि इन ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को ''हवाईजहाज में यात्रा करने जैसा अहसास'' होगा और इसके डिब्बों में सभी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ देश का पहला आरआरटीएस कॉरिडोर होगा, जोकि करीब 82 किलोमीटर लंबा होगा। इसके शुरू होने के बाद यात्री दिल्ली से मेरठ का सफर एक घंटे से कम समय में पूरा कर पाएंगे। इस दूरी को सड़क के रास्ते तय करने में फिलहाल करीब तीन से चार घंटे का समय लगता है।
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