नयी दिल्ली, 27 मई पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने बुधवार को कहा कि ऐसे समय में, जब कोविड-19 दुनिया की अर्थव्यवस्था को तबाह कर रहा है, जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए वित्तीय संसाधन विकसित देशों से भारत जैसे विकासशील देशों में शायद नहीं पहुंचेंगे ।
‘कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में पर्यावरण और टिकाऊ भविष्य के लिए क्या फिर से विचार करना होगा’ विषय पर वर्ल्ड वाइड फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) भारत के सीईओ रवि सिंह के साथ वेबिनार में प्रभु बात कर रहे थे ।
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प्रभु ने कहा कि जलवायु परिवर्तन बड़ी परिघटना है जिस पर समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो सब तबाह हो जाएगा ।
प्रभु ने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन बड़ी परिघटना है। समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह हर चीज को तबाह कर देगा । यह खतरनाक है और इस पर कदम उठाने के लिए हमें वित्तीय संसाधन की जरूरत है । लेकिन अब आर्थिक संकट के कारण कोई भी देश विकासशील देशों को मदद नहीं देना चाहेगा ।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हो सकता है कि हमारे पास वित्तीय संसाधन नहीं पहुंचें । आज मुझे लगता है कि कदम उठाने का मौका है लेकिन शायद वित्तीय संसाधन उपलब्ध नहीं होगा ।’’
पिछले साल केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने जलवायु परिवर्तन के असर के लिए विकसित दुनिया को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था कि भारत मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे नहीं झुकेगा और सबसे पहले अपने हितों की रक्षा करेगा ।
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में पर्यावरण मंत्री रहे प्रभु ने कहा कि इंसानों की हरकतों से जलवायु परिवर्तन हुआ है और लॉकडाउन से यह बात साबित हो गई है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के लिए भारत जिम्मेदार नहीं है बल्कि वह इसका शिकार हुआ है।
उन्होंने कहा, ‘‘विज्ञान के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन इंसानों की गतिविधियों के कारण हुआ है । इंसानों के हस्तक्षेप के कारण ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) का उत्सर्जन हुआ है। महामारी और लॉकडाउन ने इसे साबित किया है क्योंकि गतिविधियां रूकने से उत्सर्जन घटा है।’’
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