नयी दिल्ली, 20 अगस्त सरकार ने कहा है कि किसी निजी बैंक द्वारा प्रवर्तित बीमा कंपनी में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के आवेदनों को रिजर्व बैंक और इरडा द्वारा मंजूरी दी जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विदेशी निवेश की 74 प्रतिशत सीमा का उल्लंघन नहीं हो।
वित्त मंत्रालय की ओर से 19 अगस्त, 2021 को जारी राजपत्र अधिसूचना के मुताबिक विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण साधन) नियम, 2019 में संशोधन कर ये बदलाव किए गए हैं।
अधिसूचना में कहा गया, "इन नियमों को विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण साधन) (दूसरा संशोधन) नियम, 2021 कहा जा सकता है।"
इससे पहले इस साल मार्च में संसद ने एक विधेयक पारित कर बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर दी थी।
बीमा अधिनियम, 1938 को आखिरी बार 2015 में संशोधित किया गया था, जिसके साथ एफडीआई सीमा को बढ़ाकर 49 प्रतिशत कर दिया गया। इसकी वजह से देश में पिछले पांच वर्षों में 26,000 करोड़ रुपये का विदेशी पूंजी प्रवाह हुआ।
अधिसूचना के मुताबिक, "बीमा क्षेत्र में संयुक्त उद्यम या अनुषंगियों वाले निजी बैंकों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए आवेदन भारतीय रिजर्व बैंक के पास विचार के लिए भेजा जा सकता है जो भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) के साथ परामर्श कर इस पर विचार करेगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सीरियल नंबर एफ 8.1 और एफ 8.2 में निर्दिष्ट बीमा क्षेत्र के लिए लागू विदेशी निवेश की सीमा का उल्लंघन नहीं किया गया है।"
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