देश की खबरें | कच्चातिवु द्वीप मामले के संबंध में विदेश मंत्री जयशंकर अपना बयान दे चुके हैं: विदेश मंत्रालय

नयी दिल्ली, चार अप्रैल विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कच्चातिवु द्वीप को लेकर जारी विवाद को लेकर कहा कि विदेश मंत्री इस संबंध में पहले ही अपना बयान दे चुके हैं।

कच्चातिवु मुद्दे पर सवालों के संबंध में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मामले पर विदेश मंत्री एस जयशंकर की हाल की टिप्पणियों का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपको बताना चाहूंगा कि जो मुद्दे उठाए गए हैं, उन पर विदेश मंत्री ने दिल्ली में और गुजरात में भी प्रेस से बात की है और सभी मुद्दों पर स्पष्टीकरण दिया है।’’

जायसवाल ने कहा, ‘‘मैं कहूंगा कि आप कृपया उनकी प्रेस वार्ता देखें। आपको अपने जवाब वहां मिल जाएंगे।’’

नरेन्द्र मोदी सरकार ने कांग्रेस और उसकी सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पर 1970 के दशक के मध्य में कच्चातिवु द्वीप के श्रीलंका को कब्जे में लेने के मामले में राष्ट्रीय हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए निशाना साधा है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को दावा किया था कि कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों ने कच्चातिवु द्वीप को लेकर उदासीनता दिखायी जैसे उन्हें कोई परवाह नहीं हो और भारतीय मछुआरों के अधिकारों को छोड़ दिया जबकि कानूनी राय इसके खिलाफ थी।

जयशंकर ने संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी जैसे प्रधानमंत्रियों ने कच्चातिवु को एक ‘‘छोटा द्वीप’’ और ‘‘छोटी चट्टान’’ बताया था। उन्होंने कहा था कि यह मुद्दा अचानक सामने नहीं आया है बल्कि यह हमेशा से एक जीवंत मुद्दा रहा है।

जयशंकर ने कहा था कि इसके रिकॉर्ड मौजूद हैं कि तत्कालीन विदेश सचिव ने तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं द्रमुक के नेता एम करुणानिधि को दोनों देशों के बीच हुई बातचीत की पूरी जानकारी दी थी। उन्होंने क्षेत्रीय दल द्रमुक पर कांग्रेस के साथ 1974 में और उसके बाद एक ऐसी स्थिति उत्पन्न करने के लिए मिलीभगत करने का आरोप लगाया था जो "बड़ी चिंता" का कारण है।

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