बेंगलुरु, 17 अप्रैल करीब दो अरब साल पहले जब पृथ्वी का वातावरण ऑक्सीजनयुक्त हो रहा था तब पृथ्वी कैसी दिखती थी?
भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) और टेनेसी विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने आंध्र प्रदेश के वाईएसआर कडप्पा जिले में वेमपल्ले में पाए गए प्राचीन डोलोमाइट (कार्बोनेट) भंडारण का विश्लेषण करके एक उथले, अंतर्देशीय समुद्र के तापमान और संरचना का अनुमान लगाया है जो ‘पैलियोप्रोटेरोज़ोइक’ नामक युग में अस्तित्व में था।
बेंगलुरु स्थित आईआईएससी ने सोमवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि उनके निष्कर्ष इस बात की जानकारी प्रदान करते हैं कि उस समय की स्थितियों ने प्रकाश संश्लेषक शैवाल के उद्भव के लिए सही माहौल कैसे प्रदान किया।
इससे यह भी पता चलता है कि कैसे पृथ्वी के अतीत के बारे में डेटा का खजाना प्राचीन चट्टानों के अंदर छिपा हुआ है।
पृथ्वी विज्ञान केंद्र (सीईएएस), आईआईएससी के प्रोफेसर एवं अध्ययन से जुड़े लेखक प्रोसेनजीत घोष ने कहा, "हमारे ग्रह (पृथ्वी) की कहानी चट्टानों के विभिन्न स्तरों में लिखी गई है।"
अध्ययन के परिणाम पत्रिका ‘केमिकल जियोलॉजी’ में प्रकाशित हुए हैं।
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