देश की खबरें | आबकारी नीति मामला: अदालत ने केजरीवाल की जमानत याचिका पर पांच जून तक आदेश सुरक्षित रखा

नयी दिल्ली, एक जून राष्ट्रीय राजधानी स्थित एक अदालत ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में अंतरिम जमानत की मांग करने वाली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका पर शनिवार को अपना फैसला पांच जून तक के लिए सुरक्षित रख लिया।

मामला 2021-22 के लिए दिल्ली सरकार की अब समाप्त हो चुकी आबकारी नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार तथा धनशोधन से संबंधित है जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की जा रही है।

विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने यह उल्लेख करते हुए आदेश सुरक्षित रख लिया कि आवेदन चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत देने के लिए है, न कि उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई अंतरिम जमानत के विस्तार के लिए।

शीर्ष अदालत ने 10 मई को मुख्यमंत्री को लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए 21 दिन की अंतरिम जमानत दी थी। इसने उन्हें मतदान के अंतिम चरण के समाप्त होने के एक दिन बाद दो जून को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।

तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली और महाराष्ट्र में प्रचार किया।

न्यायाधीश द्वारा आदेश सुरक्षित रखे जाने के बाद केजरीवाल के वकील ने यह उल्लेख करते हुए अदालत से शनिवार को ही आदेश पारित करने का आग्रह किया कि केजरीवाल को रविवार को आत्मसमर्पण करना है।

हालाँकि, न्यायाधीश ने अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और कहा कि आरोपी के वकीलों के साथ-साथ अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं द्वारा प्रस्तुत दलीलें एवं दस्तावेज़ भी भारी-भरकम हैं।

कार्यवाही के दौरान, ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि केजरीवाल ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में भ्रामक दावा किया कि वह दो जून को खुद ही आत्मसमर्पण कर देंगे।

केजरीवाल ने शुक्रवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि वह दो जून को आत्मसमर्पण करेंगे। उन्होंने कहा, "मैं आत्मसमर्पण करने के लिए (रविवार को) अपराह्न लगभग तीन बजे अपने घर से चलूंगा। संभव है कि इस बार वे मुझे और अधिक प्रताड़ित करेंगे, लेकिन मैं झुकूंगा नहीं।"

आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख यह भी आरोप लगाया था, "उन्होंने मुझे तोड़ने की कोशिश की। जब मैं जेल में था तो उन्होंने मेरी दवाएं बंद कर दीं। गिरफ्तार होने के बाद मेरा वजन छह किलोग्राम कम हो गया। जब मुझे गिरफ्तार किया गया तो मेरा वजन 70 किलोग्राम था। जेल से बाहर आने के बाद मेरा वजन नहीं बढ़ा है।"

केजरीवाल ने दावा किया था कि डॉक्टरों ने कई परीक्षणों की सलाह दी है और "उन्हें लगता है कि यह किसी अंतर्निहित चिकित्सा स्थिति का संकेत हो सकता है"।

ईडी के वकील ने अदालत में कहा, "केजरीवाल ने अपनी अंतरिम जमानत अवधि के दौरान प्रचार किया और अब उन्होंने अचानक दावा किया है कि वह बीमार हैं। केजरीवाल ने तथ्यों को छिपाया और अपने स्वास्थ्य सहित अन्य चीजों के बारे में गलत बयान दिए।"

केजरीवाल के वकील ने अदालत से कहा कि मुख्यमंत्री बीमार हैं और उन्हें इलाज की जरूरत है।

ईडी ने कहा कि अंतरिम जमानत बरकरार रखने योग्य नहीं है क्योंकि निचली अदालत केजरीवाल को दो जून को आत्मसमर्पण करने का आदेश देने वाले उच्चतम न्यायालय के आदेश को संशोधित नहीं कर सकती।

जांच एजेंसी के वकील ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के आदेश में कहा गया है कि वह आत्मसमर्पण करेंगे। उस आदेश को आज तक संशोधित नहीं किया गया है। उन्हें समर्पण करना होगा। इस अदालत के आदेश के कारण वह अंतरिम जमानत पर नहीं हैं। उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद वह अंतरिम जमानत पर हैं। वह उच्चतम न्यायालय के आदेश को आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जो उचित नहीं है।’’

मेहता ने कहा कि उन्हें स्वतंत्रता दी गई है कि वह नियमित जमानत के लिए आवेदन करेंगे और अंतरिम जमानत के विस्तार की कोई स्वतंत्रता नहीं है।

उन्होंने कहा, "जो व्यक्ति कह रहा है कि उसकी हालत गंभीर है, उसके आचरण को देखो। जिस दिन से वह रिहा हुआ है, वह हर जगह प्रचार कर रहा है और एक मिनट या दो मिनट नहीं, बल्कि घंटों तक प्रचार कर रहा है। उस समय, उसके स्वास्थ्य को कुछ नहीं होता है।"

ईडी ने कहा कि केजरीवाल चिकित्सा जांच में देरी कर न्यायालय को धोखा देना चाहते हैं। इसने कहा, "अगर किसी परीक्षण की आवश्यकता होगी, तो हम जेल में सभी सुविधाएं प्रदान करेंगे। यदि आवश्यक हुआ तो हम (केजरीवाल को) एम्स या किसी अस्पताल में ले जाएंगे।"

इसके वकील ने कहा, ‘‘एक व्यक्ति जो टीवी पर दावा करता है कि मैं मर सकता हूं, किडनी फेल हो सकती है आदि, वह 25 मई के बाद से किसी बुनियादी परीक्षण के लिए नहीं गया? वादी द्वारा व्यवस्था के साथ खेल खेला जा रहा है।’’

राहत की मांग करते हुए केजरीवाल के वकील ने अदालत से कहा कि खराब स्वास्थ्य के बावजूद आप नेता ने प्रचार किया क्योंकि यही वह उद्देश्य था जिसके लिए शीर्ष अदालत ने अंतरिम जमानत दी थी।

उन्होंने कहा, "प्रचार अभियान के कारण तनाव से उनका शर्करा स्तर बढ़ गया। आज, जब मैं (केजरीवाल) बिना परीक्षण कराए वापस जेल जा रहा हूं, तो मैं खुद को जोखिम में डाल रहा हूं। यह केवल इस तथ्य को सुनिश्चित करने के लिए है कि मुझे दिया गया उपचार मेरी बीमारी के अनुरूप हो। मैं दो महीने या तीन महीने के लिए अंतरिम जमानत नहीं मांग रहा हूं। ऐसा कौन सा पूर्वाग्रह है जो उन्हें परेशान करेगा।''

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)