नयी दिल्ली, 19 मई उच्चतम न्यायालय ने 31,000 से अधिक ग्लॉक पिस्तौल की आपूर्ति के लिए गृह मंत्रालय द्वारा 2011 में जारी निविदा की शर्तों से उत्पन्न विवादों को सुलझाने के लिए शीर्ष अदालत की पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा को शुक्रवार को एकमात्र मध्यस्थ के रूप में नियुक्त किया।
प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र के वकील की दलीलों को खारिज कर दिया कि राष्ट्रपति के नाम पर भारत संघ द्वारा किए गए अनुबंध उन प्रावधानों से मुक्त हैं, जो मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 12(5) के तहत एक पक्ष के हितों के टकराव से बचाते हैं।
पीठ में न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला भी शामिल हैं।
पीठ ने एकमात्र मध्यस्थ की नियुक्ति के लिए अधिनियम की धारा 11(6) के तहत मैसर्स ग्लॉक एशिया-पैसिफिक लिमिटेड के एक आवेदन पर अपना फैसला सुनाया।
पीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि वह शीर्ष न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा को एकमात्र मध्यस्थ के रूप में नियुक्त करती है, जो मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की संशोधित धारा 12 के तहत अनिवार्य खुलासों के अधीन पक्षों के बीच हुई निविदा की शर्तों के तहत और उसके संबंध में उत्पन्न होने वाले विवादों पर निर्णय लेने के लिए मध्यस्थ के रूप में कार्य करेंगी।
शीर्ष अदालत ने कहा कि गृह मंत्रालय (खरीद इकाई) ने फरवरी 2011 में 31,756 ग्लॉक पिस्तौल की आपूर्ति के लिए एकल पार्टी निविदा जारी की थी।
इसने कहा कि आवेदक के पक्ष में बोली की पुष्टि की गई थी और मार्च 2011 में मंत्रालय द्वारा स्वीकृति की एक निविदा जारी की गई थी।
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