तेजपुर (असम), 15 फरवरी असम के सोनितपुर जिले में लगभग 1,900 हेक्टेयर वन एवं राजस्व भूमि से ‘‘अतिक्रमण’’ हटाने के लिए बेदखली की प्रक्रिया बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रही। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
इस भूमि पर करीब 12,000 लोग कथित रूप से अवैध तरीके से रह रहे थे।
अधिकारी ने बताया कि प्रशासन ने सुबह से बुराचापोरी वन्यजीव अभयारण्य के पांच स्थानों और निकटवर्ती सरकारी भूमि से ‘‘अतिक्रमण’’ हटाने के लिए बेदखली अभियान शुरू कर दिया।
अधिकारी ने कहा, ‘‘हम आज लाठीमारी, गणेश टापू, बाघे टापू, गुलिरपार और सियाली में बेदखली की प्रक्रिया चला रहे हैं। अभी तक यह प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही है और किसी अप्रिय घटना की जानकारी नहीं मिली है।’’
सोनितपुर जिला प्रशासन ने मंगलवार को बेदखली की प्रक्रिया शुरू की थी और इस दौरान बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था।
इस प्रक्रिया से प्रभावित कुछ लोगों ने कहा कि इन इलाकों में बड़ी संख्या में बंगाली भाषी मुसलमान रहते थे। उन्होंने कहा कि इनमें से अधिकतर लोग पिछले कुछ सप्ताह में नोटिस मिलने के बाद अपने घर छोड़कर जा चुके है और कुछ लोग परिसरों को खाली करने की प्रक्रिया में थे, तभी बेदखली का काम शुरू हो गया।
लोगों को सुबह से ही विभिन्न स्थानों पर ट्रैक्टर ट्रॉलियों में अपना सामान लादते देखा गया।
ध्वस्त हो चुके एक घर से अपना सामान एकत्र कर रही फिरोजा बेगम ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने कहा था कि वह 20 फरवरी से बेदखली की प्रक्रिया शुरू करेगा, लेकिन अचानक ‘‘बिना किसी सूचना के बेदखली आज से शुरू कर दी गई।
विपक्षी दल कांग्रेस ने बेदखली की इस प्रक्रिया के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार की निंदा की और कहा कि कई प्रभावित परिवार वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत भूमि अधिकार के हकदार हैं।
सोनितपुर के उपायुक्त देब कुमार मिश्र ने मंगलवार को ‘पीटीआई ’ से कहा था कि वन क्षेत्र पर बीते दशकों में हजारों लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया था और प्रशासन ने फिलहाल जारी अभियान के दौरान 1892 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का फैसला किया।
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