इस फैसले का यह मतलब नहीं कि ईयू से बाहर डाटा के स्थानांतरण पर तत्काल रोक लग जाएगी क्योंकि एक और कानूनी तंत्र है जिसका कुछ कंपनियां इस्तेमाल कर सकती हैं।
लेकिन इसका मतलब यह है कि डाटा स्थानांतरण की पड़ताल में इजाफा किया जाएगा और ईयू व अमेरिका को एक नयी व्यवस्था तलाशनी होगी जो अमेरिका में ईयू के आंकड़ों को भी वैसी ही निजता सुरक्षा प्रदान करे जैसी उन आंकड़ों को यूरोपीय संघ में मिली हुई है।
यह मामला अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के पूर्व कर्मचारी एडवर्ड स्नोडेन द्वारा 2013 में यह खुलासा करने के बाद शुरू हुआ कि अमेरिकी सरकार लोगों के ऑनलाइन डाटा और संवाद की जासूसी करती है।
इन खुलासा में यह विवरण भी शामिल था कि कैसे फेसबुक अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को यूरोपीय लोगों के व्यक्तिगत डाटा तक पहुंच उपलब्ध कराती है।
ऑस्ट्रियाई कार्यकर्ता और विधि छात्र मैक्स श्रेम्स ने उस साल फेसबुक के खिलाफ शिकायत दायर की थी और दलील दी थी कि निजी डाटा अमेरिका नहीं भेजा जाना चाहिए जैसा कि कई कंपनियां करती हैं, क्योंकि वहां डाटा सुरक्षा इतनी पुख्ता नहीं है जितनी यूरोप में है।
एपी
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)











QuickLY