नयी दिल्ली, छह जनवरी उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को रक्षा संबंधी लंबित मामलों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) पीठ स्थापित करने का आह्वान किया।
न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति एन कोटेश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि वर्तमान में एएफटी, चंडीगढ़ पर इन राज्यों के बड़ी संख्या में लंबित मामलों का बोझ है और जम्मू-कश्मीर, शिमला और धर्मशाला में सर्किट पीठ स्थापित करने से मामलों के तेज गति से निपटान में मदद मिलेगी।
एएफटी में रिक्तियों को भरने में देरी के लिए अकेले केंद्र को दोषी ठहराने से इनकार करते हुए पीठ ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से कहा कि सर्किट पीठ स्थापित करने की संभावनाएं तलाशें।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘इस अदालत के वर्तमान न्यायाधीश समितियों का नेतृत्व कर रहे हैं। यहां तक कि मैं भी कुछ समितियों का प्रमुख हूं जो न्यायाधिकरणों के सदस्यों की नियुक्ति का ध्यान रखती है। कभी-कभी काम का बोझ इतना अधिक होता है कि प्रक्रिया में देरी हो जाती है। हमें एक तंत्र तैयार करना होगा ताकि किसी न्यायाधिकरण में संभावित रिक्ति से छह महीने पहले रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया शुरू हो जाए।’’
शीर्ष अदालत ने केंद्र से न्यायाधिकरणों की कुल स्वीकृत संख्या और इन अर्ध न्यायिक निकायों में रिक्तियों का आंकड़ा एकत्र करने और इन पदों को व्यवस्थित रूप से भरने पर सुझाव देने को कहा।
केंद्र को चार सप्ताह के भीतर न्यायाधिकरणों में पदों को भरने के लिए चल रही प्रक्रियाओं का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
शीर्ष अदालत उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें एएफटी में सदस्यों की शीघ्र नियुक्ति के लिए केंद्र को निर्देश देने का आग्रह किया गया है।
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