देश की खबरें | एनरिका लेक्सी मामला : अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने भारतीय कार्रवाई को सही ठहराया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने एनरिका लेक्सी मामले में भारतीय अधिकारियों की कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा है कि भारत इस मामले में मुआवजा पाने का हकदार है लेकिन नौसैनिकों को आधिकारिक छूट प्राप्त होने के कारण उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चला सकता है।

नयी दिल्ली, दो जुलाई हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने एनरिका लेक्सी मामले में भारतीय अधिकारियों की कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा है कि भारत इस मामले में मुआवजा पाने का हकदार है लेकिन नौसैनिकों को आधिकारिक छूट प्राप्त होने के कारण उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चला सकता है।

वर्ष 2012 के इस मामले में दो इतालवी नौसैनिकों पर दो भारतीय मछुआरों की जान लेने का आरोप है।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने कहा कि दोनों नौसैनिकों ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है और इसके परिणामस्वरूप इटली ने यूएनसीएलओएस (समुद्र संबंधी कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि) के तहत भारत की नौवहन स्वतंत्रता का उल्लंघन किया।

श्रीवास्तव बृहस्पतिवार को ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित कर रहे थे।

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फरवरी, 2012 में भारत ने इटली के दो नौसैनिकों मैसीमिलैनो लातोरे और सलवातोरे गिरोने पर दो भारतीय मछुआरों की हत्या का आरोप लगाया था।

इस मामले के न्याय क्षेत्र का मुद्दा दोनों देशों के बीच एक बड़ा विषय बन गया था और भारत का कहना था कि यह घटना भारतीय जल क्षेत्र में हुई और मारे गए मछुआरे भी भारतीय थे। इसलिए इस मामले की सुनवाई भारतीय कानूनों के अनुसार होनी चाहिए। वहीं इटली ने दावा किया कि गोलीबारी भारतीय जल क्षेत्र से बाहर हुई थी और उसके नौसैनिक इतालवी ध्वज के वाले जहाज पर सवार थे।

श्रीवास्तव ने कहा कि न्यायाधिकरण ने फैसला दिया कि भारत जीवन के नुकसान सहित अन्य नुकसान को लेकर मुआवजे का हकदार है।

उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण ने यूएनसीएलओएस के प्रावधानों के तहत भारतीय अधिकारियों के आचरण को सही पाया है।

श्रीवास्तव ने कहा, "न्यायाधिकरण ने पाया कि इस घटना पर भारत और इटली के बीच समवर्ती अधिकार क्षेत्र है और नौसैनिकों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही के लिए वैध कानूनी आधार है।"

उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण ने नौसैनिकों को हिरासत में रखने के लिए मुआवजे के इटली के दावे को खारिज कर दिया। हालांकि उसने यह पाया कि सरकारी अधिकारियों की तरह नौसैनिकों को मिली छूट भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र के लिए अपवाद है और इसलिए उन्हें नौसैनिकों के खिलाफ फैसला करने से रोक दिया।

इस बीच इतालवी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दोनों नौसैनिक भारतीय अदालतों के न्यायक्षेत्र से छूट के हकदार हैं।

इस विवाद के संबंध में इटली के अनुरोध पर 2015 में यूएनसीएलओएस की धाराओं के तहत न्यायाधिकरण का गठन किया गया था।

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