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जरुरी जानकारी | मांग निकलने से खाद्य तेल तिलहनों में सुधार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. खाद्यतेलों की मांग निकलने से शनिवार को दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में अधिकांश तेल-तिलहन कीमतों में सुधार दिखाई दिया जिससे मूंगफली तेल तिलहन, सोयाबीन तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन, बिनौला तेल कीमतों में सुधार आया जबकि ऊंचे पर कम बिकवाली के बीच सरसों तेल-तिलहन और किसानों द्वारा नीचे भाव पर बिकवाली कम करने और डी-आयल्ड केक (डीओसी) के दाम मजबूत होने से सोयाबीन तेल के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

जरुरी जानकारी | मांग निकलने से खाद्य तेल तिलहनों में सुधार

नयी दिल्ली, 17 जून खाद्यतेलों की मांग निकलने से शनिवार को दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में अधिकांश तेल-तिलहन कीमतों में सुधार दिखाई दिया जिससे मूंगफली तेल तिलहन, सोयाबीन तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन, बिनौला तेल कीमतों में सुधार आया जबकि ऊंचे पर कम बिकवाली के बीच सरसों तेल-तिलहन और किसानों द्वारा नीचे भाव पर बिकवाली कम करने और डी-आयल्ड केक (डीओसी) के दाम मजबूत होने से सोयाबीन तेल के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

कारोबारी सूत्रों ने कहा कि सीपीओ में कामकाज ही नहीं है और माल की कमी है। हाजिर बाजार में जब सूरजमुखी तेल सस्ते में उपलब्ध हो तो ऐसे में कोई सीपीओ की ओर नजर उठाकर भी नहीं देख रहा।

सूत्रों ने कहा कि सरकार को देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए इसका बाजार बनाने पर सबसे अधिक ध्यान देना चाहिये। इस बार जिस प्रकार किसानों का सरसों नहीं खपा है और देशी सोयाबीन फसल का भी स्टॉक बच गया है, उससे किसान दु:खी हैं। बाजार की अनश्चितताओं से जूझने के बजाय किसान उस फसल का रुख कर सकते हैं जिससे वे अपनी फौरी जरुरतें और आगे के कामकाज की जरुरतों को पूरा कर सकें। इस ओर सरकार को संजीदगी से विचार करना होगा कि कैसे किसानों को उनकी फसल खपने का भरोसा दे।

सूत्रों ने कहा कि पिछले 20 -25 साल से यही देखा जा रहा है कि सिर्फ खाद्यतेल के दाम को लेकर हौव्वा बनाया जाता है जबकि खाद्यतेल के मुकाबले कई गुना अधिक खपत वाले दूध के दाम कई दफा बढ़ाये जा चुके हों।

सरकार रिफायनरी वाले और तेल उद्योग से निविदा मंगाकर राशन की दुकानों पर सस्ते खाद्य तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करा सकती है। इससे तेल उद्योग चलेगा, विदेशी मुद्रा बचत होगी और हमारी अर्थव्यवस्था भी अच्छी होगी।

इस कदम से उपभोक्ताओं से सस्ते आयातित तेल पर प्रीमियम वसूलने की प्रथा पर रोक लगेगी और किसी को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) कम करने के लिए कहने की झंझट से मुक्ति भी मिलेगी।

तिलहन उद्योग से देश का भारी भरकम डेयरी क्षेत्र और मुर्गीपालन का काम जुड़ा है इसलिए भी तेल तिलहन का अपना खुद का उत्पादन बढ़ाना बेहद जरूरी है। इससे हम मुर्गीदाने और मवेशीचारे का निजी इस्तेमाल करते हुए, अधिशेष उत्पादों का निर्यात कर धन भी कमा सकते हैं।

सूत्रों ने कहा कि सस्ते आयातित तेलों की भरमार के समय मंदी के दौर में बिनौला तेल मिलों ने बिनौला तेल, सीपीओ से भी कम दाम पर बेच दिया और अब जब बिनौले तेल की कमी पड़ गयी है और बाजार में आवक घटने लगी है तो फिर से इसका भाव सीपीओ से दो तीन रुपये किलो ऊंचा हो गया है।

शनिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 4,845-4,945 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,625-6,685 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,550 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,470-2,745 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 9,450 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,605 -1,685 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,605 -1,715 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,550 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,450 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,100 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,500 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,650 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,240-5,305 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,005-5,080 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jun 17, 2023 08:32 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).