देश की खबरें | दंगा मामले में गिरफ्तार खातून के आरोपों के समाधान के लिए कर्मचारियों को बदला जाए : अदालत

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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, पांच नवंबर दिल्ली की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को तिहाड़ जेल के अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगर जरूरत हो तो उन कर्मचारियों को बदल दिया जाए जिनपर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुए दंगों के मामले में गिरफ्तार छात्र कार्यकर्ता गुलफिशा खातून ने मानसिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है।

खातून को गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत नामजद किया गया है।

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उसने आरोप लगाया था कि जेल कर्मचारी उसके खिलाफ सांप्रदायिक टिप्पणियां करते हैं जिससे उसे मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जेल कर्मचारियों और खातून के बीच कुछ बहस हुई और ‘‘यह आवेदक (खातून) का कथन बनाम जेल स्टाफ का कथन है।’’

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उन्होंने कहा कि संबंधित जेल अधीक्षक ने मामले की जांच की है।

न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, ‘‘मामले के तथ्यों को देखते हुए, आरोपों/आरोपों को खारिज किए जाने संबंधी विषय में जाए बिना जेल अधीक्षक को यह निर्देश दिया जाना मुझे उचित लगता है कि किसी टकराव से बचने के लिए आवेदक के वार्ड या ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को बदला जाए या अन्य कदम उठाए जाएं जो उन्हें उचित लगते हों।’’

अदालत ने कहा कि यदि खातून को कोई ऐसी शिकायत है कि उसके खिलाफ कोई अपराध किया जा रहा है तो वह संबंधित अधिकारक्षेत्र मजिस्ट्रेट से शिकायत कर सकती है।

खातून ने अपने वकील महमूद प्राचा के माध्यम से आरोप लगाया था कि जेल स्टाफ उसे गाली देता है और सांप्रदायिक टिप्पणियां करता है जिससे उसे मानसिक और भावनात्मक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

प्राचा ने अधिकारियों के खिलाफ र्कारवाई किए जाने का आग्रह किया था।

खातून ने आरोप लगाया था, ‘‘मुझे जेल में समस्या है। जबसे मुझे यहां लाया गया है, जेल कर्मचारी मुझसे लगातार भेदभाव कर रहे हैं। उन्होंने मुझे शिक्षित आतंकवादी कहा और वे मेरे खिलाफ सांप्रदायिक टिप्पणियां करते हैं। मैं यहां मानसिक उत्पीड़न का सामना कर रही हूं। यदि मैं खुद को नुकसान पहुंचाती हूं तो इसके लिए केवल जेल अधिकारी जिम्मेदार होंगे।’’

तिहाड़ जेल के अधीक्षक ने पूर्व में अदालत से था कि खातून ‘‘आक्रामक’’ है और उसने कई बार जेल कर्मचारियों से दुर्व्यवहार किया।

अधिकारियों ने कहा था कि उसे कर्मचारियों से दुर्व्यवहार के आरोप में पूर्व में व्यवहार में सुधार करने के लिए सुधारात्मक दंड दिया जा चुका है।

अधीक्षक ने कहा था कि खातून की बार-बार की शिकायतों के चलते आगे किसी असहज स्थिति से बचने के लिए उन कर्मचारियों को वार्ड से हटा दिया गया जिनपर उसने आरोप लगाया था।

अधिकारियों ने कहा था कि 15 अक्टूबर को केंद्रीय कारागार नंबर छह में 48 मुस्लिम महिला कैदी बंद थीं और उनमें से किसी ने ऐसी शिकायत नहीं की।

उन्होंने कहा था कि जांच में पता चला कि खातून और जेल स्टाफ ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं। इसलिए दोनों पक्षों को सुना गया और उन्हें जेल में अनुशासन बनाए रखने के लिए जेल नियमों का पालन करने की सलाह दी गई।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में संशोधित नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच झड़प के बाद 24 फरवरी को सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी जिसमें कम से कम 53 लोग मारे गए थे और लगभग 200 अन्य घायल हुए थे।

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