देश की खबरें | राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द, स्कूल बंद

जयपुर, आठ मई भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद उपजे हालात के मद्देनजर राजस्थान सरकार ने सीमावर्ती इलाकों में तैनात प्रशासनिक और पुलिस तथा चिकित्साकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य के चार सीमावर्ती जिलों में सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। एहतियात के तौर पर गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में स्कूल बंद हैं। ये जिले भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित हैं।

राज्य में पुलिस, चिकित्सक और पैरामेडिकल कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को यहां उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद की स्थिति की समीक्षा की और छुट्टियां रद्द करने के निर्देश दिए।

सूत्रों ने बताया कि राज्य के मुख्य सचिव सुधांश पंत और पुलिस महानिदेशक यूआर साहू ने संभागीय आयुक्तों, जिलाधिकारी सहित अन्य आला अधिकारियों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की और मौखिक रूप से उन्हें अपने-अपने मुख्यालयों में उपस्थित रहने के निर्देश दिए।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने आपदा प्रबंधन के दृष्टिगत सभी चिकित्सकों एवं पैरा मेडिकल कर्मचारियों के अवकाश आगामी आदेशों तक निरस्त कर दिए हैं। साथ ही, राज्यस्तरीय नियंत्रण कक्ष में अधिकारियों की ड्यूटी लगाकर सभी आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि सीमावर्ती एवं अन्य क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की दृष्टि से विभाग ने एहतियातन कदम उठाते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं।

इसके तहत विभाग में कार्यरत समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अवकाश तत्काल प्रभाव से निरस्त किए गए हैं। साथ ही, सभी चिकित्सकों, नर्सिंगकर्मियों एवं पैरामेडिकल कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सक्षम स्तर से अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ें।

राजस्थान पुलिस ने पाकिस्तान से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। इस संदर्भ में राजस्थान पुलिस ने अपने सभी पुलिसकर्मियों की सभी प्रकार की छुट्टियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशासन, कानून एवं व्यवस्था) विशाल बंसल द्वारा बृहस्पतिवार को सभी रेंज आईजी, कमिश्नर सहित जिला एसपी, डीसीपी एवं कमांडेंट को ईमेल संदेश जारी कर इस संबंध में सख्त निर्देश दिए गए हैं।

बंसल ने बताया कि प्रदेश के सभी पुलिसकर्मियों के अवकाश पर रोक लगाई गई है। केवल विशेष परिस्थितियों में पुलिसकर्मियों को कम से कम अवकाश जिला एसपी, डीसीपी या कमांडेंट द्वारा ही स्वीकृत किया जाएगा।

हालांकि, पहलगाम हमले के बाद से ही पुलिसकर्मियों के अवकाश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। मौजूदा हालात और सीमा पर बढ़ते हुए तनाव को देखते हुए बृहस्पतिवार को पुलिस मुख्यालय से आधिकारिक आदेश जारी किए गए। आदेश के अनुसार अग्रिम आदेश तक अवकाशों पर प्रतिबंध जारी रहेगा।

सभी पुलिस कर्मियों को अपने मुख्यालयों पर बने रहने और किसी भी आपात स्थिति के लिए 24 घंटे ड्यूटी पर उपलब्ध रहने का निर्देश दिया गया है।

भारत द्वारा पाकिस्तान में आतंकी शिविरों पर किए गए हवाई हमले के मद्देनजर पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के निर्देश दिए गए हैं।

पाकिस्तान पर हवाई हमले के बाद राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट के तहत अधिकारियों ने निवासियों की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। वहीं सीमावर्ती जिलों में संभावित हवाई खतरों के प्रति संवेदनशीलता को कम करने के लिए स्कूलों को बंद कर दिया गया है।

आपातकालीन स्थिति को देखते हुए जैसलमेर के जिलाधिकारी प्रताप सिंह नाथावत ने जिले के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। उन्होंने अगले आदेश तक सभी स्कूली परीक्षाओं को स्थगित करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश 8 मई से अगले आदेश तक जारी रहेगा।

आदेश के अनुसार बच्चों की छुट्टी रहेगी और शिक्षक समय पर पहुंचेंगे। आदेश का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बाड़मेर की जिलाधिकारी टीना डाबी और जोधपुर के जिलाधिकारी गौरव अग्रवाल ने भी एक सार्वजनिक परामर्श जारी किया है, जिसमें नागरिकों से सतर्क रहने और घबराने से बचने का आग्रह किया गया है। इसमें संभावित खतरों के मद्देनजर आपातकालीन तैयारियों और सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।

परामर्श में इस अनिश्चित समय के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण उपायों का विवरण दिया गया है। आम नागरिकों को किसी भी अफवाह फैलाने वाले की सूचना पुलिस को देने के लिए लाउडस्पीकर, सत्यापित व्हाट्सएप ग्रुप, पंचायत घोषणा और रेडियो प्रसारण जैसे आधिकारिक संचार चैनलों पर ही निर्भर रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

परामर्श के तहत निवासियों को सलाह दी गई है कि वे पहचान पत्र और राशन कार्ड सहित आवश्यक दस्तावेज़ों को एक ही आसानी से सुलभ बैग में पैक करके रखें और आस-पास के सुरक्षित क्षेत्रों या सामुदायिक भवनों से खुद को परिचित करें।

सूत्रों के अनुसार बाड़मेर, जैसलमेर, रात नौ बजे से सुबह चार बजे तक ब्लैकआउट रहेगा। जोधपुर में रात साढ़े 12 बजे से चार बजे तक ब्लैक आउट रहेगा।

बीकानेर में प्रशासन ने ड्रोन उड़ाने और आतिशबाजी पर रोक लगाई है। श्रीगंगानगर में भी आतिशबाजी पर रोक रहेगी।

दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह अनुशंसा की जाती है कि हवाई हमले या सायरन की स्थिति में, व्यक्तियों को अपने घरों के सबसे निचले, अंदरूनी इलाकों में, खिड़कियों से दूर, सुरक्षा के लिए मजबूत फर्नीचर का उपयोग करना चाहिए और गैस सिलेंडर बंद करते समय सभी दरवाजे और खिड़कियाँ बंद रखना चाहिए।

सीमावर्ती क्षेत्रों के ग्रामीणों को विशेष रूप से सलाह दी गई है कि वे अपने वाहनों में ईंधन भरकर रखें और निकासी के लिए तैयार रहें, पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें और बुजुर्गों, बच्चों और विकलांग व्यक्तियों को प्राथमिकता दें।

स्थानीय अधिकारियों, जिनमें गांव के अधिकारी भी शामिल हैं, को आपदा प्रबंधन समितियां बनाने और सामुदायिक आश्रय तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इसके अलावा, अधिकारियों ने पांच सीमावर्ती जिलों जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर और बीकानेर में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद करने की घोषणा की है। जोधपुर के सभी कॉलेज भी बंद हैं। ये बंद 8 मई से अगले आदेश तक प्रभावी रहेंगे।

इसके अलावा, एहतियात के तौर पर बीकानेर, किशनगढ़ (अजमेर) और जोधपुर के हवाई अड्डों पर उड़ान संचालन 10 मई तक निलंबित कर दिया गया है।

बढ़ी हुई सुरक्षा के मद्देनजर, राज्य सरकार ने सीमा पार से किसी भी संभावित जवाबी कार्रवाई के लिए तैयारी सुनिश्चित करने के लिए जिला कलेक्टरों को व्यापक दिशा-निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल लागू करने का निर्देश दिया गया है। इन प्रोटोकॉल में यह सुनिश्चित करना शामिल है कि अस्पतालों में आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध हों और चिकित्सा कर्मी स्टैंडबाय पर हों। रक्त बैंकों को सभी रक्त प्रकारों की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने की आवश्यकता होती है, और यदि आवश्यक हो तो विशिष्ट अस्पतालों और स्कूलों को अस्थायी चिकित्सा उपचार केंद्र या नागरिकों के लिए आश्रय के रूप में नामित किया गया है।

जलदाय विभाग को आपातकालीन जल आपूर्ति सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया है, जबकि जिला प्रशासन को घबराहट के कारण होने वाली कमी को रोकने के लिए भोजन, ईंधन और आवश्यक वस्तुओं के भंडार को बनाए रखने की जिम्मेदारी है।

राज्य ने सीमा के पास के गांवों के लिए निकासी योजना तैयार करने के लिए स्थानीय अधिकारियों, सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय के लिए प्रावधान भी स्थापित किए हैं। तनाव बढ़ने की स्थिति में, निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तेजी से पुनर्वास की रणनीति लागू की जाएगी।

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