जरुरी जानकारी | पर्यावरण अनुकूल आर्थिक वृद्धि पर जोर, आठ साल में सौर ऊर्जा क्षमता 20 गुना बढ़ी: राष्ट्रपति मुर्मू

नयी दिल्ली, 31 जनवरी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि सरकार आर्थिक विकास को गति देने के साथ हरित यानी पर्यावरण अनुकूल वृद्धि पर भी ध्यान दे रही है। इसी का परिणाम है कि पिछले आठ साल में सौर ऊर्जा क्षमता करीब 20 गुना बढ़ी है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार देश के विकास के लिए जिस गति और पैमाने पर काम कर रही है, उसका लाभ दिख रहा है।

राष्ट्रपति ने बजट सत्र के पहले दिन संसद के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए अपने पहले अभिभाषण में कहा, ‘‘देश ने उस सोच को बदला है जो प्रगति और प्रकृति को परस्पर विरोधी मानती थी। सरकार विकास को गति देने के साथ हरित वृद्धि पर ध्यान दे रही है और पूरे विश्व को मिशन ‘लाइफ’ से जोड़ने पर बल दे रही है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘पिछले आठ साल में सौर ऊर्जा क्षमता करीब 20 गुना बढ़ी है और देश नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता में दुनिया में चौथे स्थान पर है। देश में कुल बिजली उत्पादन की 40 प्रतिशत क्षमता गैर-जीवाश्म ईंधन (स्वच्छ ईंधन) से पैदा करने का लक्ष्य नौ साल पहले हासिल कर लिया गया।’’

मुर्मू ने कहा, ‘‘ सरकार ने हाल में मिशन हाइड्रोजन को भी स्वीकृति दी है। यह हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश में लाखों करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने वाला है। इससे स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी विदेशों पर हमारी निर्भरता कम होगी।’’

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार नवोन्मेष और उद्यमिता पर काफी बल दे रही है। इससे दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले हमारे देश की ताकत का सही उपयोग हो रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘ आज हमारे युवा अपने नवोन्मेष की ताकत दुनिया को दिखा रहे हैं। देश 2015 में वैश्विक नवोन्मेष सूचकांक में 81वें स्थान पर था। अब हम 40वें स्थान पर आ गये हैं। सात साल पहले जहां देश में कुछ सौ पंजीकृत स्टार्टअप थे, वहीं आज यह संख्या लगभग 90 हजार पर पहुंच गयी है।’’

बुनियादी ढांचा क्षेत्र का जिक्र करते हुए मुर्मू ने कहा, ‘‘ एक समय था जब बुनियादी ढांचे की बड़ी परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पाती थी। अलग-अलग विभाग, अलग-अलग सरकारें,अपनी-अपनी सुविधा से काम करती थीं। इससे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग भी होता था,समय भी अधिक लगता था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान बनाकर इन चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाया है। पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भी उत्साह दिखाया है। इससे देश में ‘मल्टी-मॉडल’ संपर्क सुविधा का भी विस्तार होगा।’’

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘सरकार देश को विश्व का सबसे प्रतिस्पर्धी लॉजिस्टिक केंद्र बनाने के लिए काम कर रही है। इसके लिए पिछले वर्ष देश में राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति लागू की गई है। इस नीति के लागू होने से लॉजिस्टिक से जुड़ी लागत में काफी कमी आएगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में पिछले आठ साल के दौरान 55 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। जल्द ही भारतमाला परियोजना के तहत देश के 550से ज्यादा जिले राजमार्ग से जुड़ जाएंगे। अर्थव्यवस्था को गति देने वाले गलियारों की संख्या छह बढ़कर 50 होने वाली है।’’

विमानन क्षेत्र का जिक्र करते हुए मुर्मू ने कहा, ‘‘इसी तरह, देश का विमानन क्षेत्र भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। साल 2014 तक जहां देश में हवाई अड्डों की संख्या 74 थी, वह अब बढ़कर 147 हो गई है। आज भारत दुनिया का तीसरा बड़ा विमानन बाजार बन चुका है। इसमें ‘उड़ान’ योजना की भी बहुत बड़ी भूमिका है।’’

इसी तरह भारतीय रेलवे में आधुनिकीकरण का काम तेजी से जारी है। वंदे भारत एक्सप्रेस के रूप में एक आधुनिक और ‘सेमी हाईस्पीड’ ट्रेन भारतीय रेल का हिस्सा बन चुकी है।

उन्होंने कहा कि बीते आठ साल में देश में मेट्रो नेटवर्क में तीन गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई है। आज 27 शहरों में मेट्रो ट्रेन पर काम चल रहा है। इसी प्रकार देशभर में 100 से ज्यादा नए जलमार्ग भी विकसित किए जा रहे हैं। ये नए जलमार्ग देश में परिवहन क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव लाने में मदद करेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘सरकार देश के विकास के लिए जिस गति और पैमाने पर काम कर रही है, वह अभूतपूर्व है...।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस सरकार के आने के बाद गरीबों के लिए औसतन प्रतिदिन 11 हमार घर बनाए गए हैं। इसी अवधि में भारत में हर रोज औसतन ढाई लाख लोग ब्रॉडबैंड कनेक्शन से जुड़े। हर रोज 55 हजार से ज्यादा गैस कनेक्शन दिए गए। मुद्रा योजना के तहत हर रोज 700 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज दिया गया।’’

राष्ट्रपति ने कहा ‘मेड इन इंडिया’ अभियान और आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता का लाभ देश को मिलना शुरू हो चुका है। आज देश में विनिर्माण की अपनी क्षमता भी बढ़ रही है और दुनियाभर से भी विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियां यहां आ रही हैं।

सुधारों का जिक्र करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि जनधन-आधार-मोबाइल से फर्जी लाभार्थियों को हटाने से लेकर ‘एक देश एक राशन कार्ड’ तक, एक बहुत बड़ा स्थायी सुधार हमने किया है। बीते वर्षों में डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के रूप में, डिजिटल इंडिया के रूप में, एक स्थायी और पारदर्शी व्यवस्था देश ने तैयार की है।

मुर्मू ने कहा, ‘‘आज 300 से ज्यादा योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते तक पहुंच रहा है। अबतक पूरी पारदर्शिता से 27 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम करोड़ों लोगों तक पहुंचाई गई है।’’

रमण अजय

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