नयी दिल्ली, 25 जून सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रविवार को कहा कि जून 1975 से मार्च 1977 के बीच आपातकाल का वक्त स्वतंत्रता के बाद के लोकतांत्रिक भारत के इतिहास में ‘‘सबसे स्याह वक्त’’ है।
मेहता ने आपातकाल पर आयोजित एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि पिछले दशक में लोगों ने ‘‘तथ्यात्मक तौर से गलत विमर्श को’’ सुना है और इस दौरान बहुसंख्यकवादी शासन, शासन में मनमानी और न्यायपालिका में सरकार का हस्तक्षेप जैसे जुमले सुने गए हैं।
उन्होंने कहा कि वकीलों को ‘‘कानूनी तर्कों’’ के जरिए इसका विरोध करना चाहिए।
मेहता ने कहा कि लोग अब ‘‘सबसे सुरक्षित संभावित संवैधानिक परिदृश्य’’ में हैं।
उन्होंने कहा, ''1975 से 77 तक का आपातकाल का वक्त आजादी के बाद के लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दौर है।''
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