देश की खबरें | एल्गार परिषद मामला : अदालत ने पत्र के हवाले से कहा कि आरोपी देश में अराजकता फैलाना चाहते थे

मुंबई, 18 फरवरी मुंबई में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने एल्गार परिषद-माओवादी मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि तीनों आरोपियों ने प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के अन्य सदस्यों की मदद से देश में अराजकता पैदा करने और केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए ‘गंभीर षड़यंत्र’ रचा।

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद एक पत्र से प्रथम दृष्टया यह पता चलता है कि भाकपा (माओवादी) देश में ‘मोदी राज’ को समाप्त करने पर आमादा था और वे प्रधानमंत्री मोदी के रोड शो को निशाना बनाकर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या जैसी घटना को अंजाम देने के बारे में भी सोच रहे थे।

इस मामले में गिरफ्तार सागर गोरखे, रमेश गाइचोड़ और ज्योति जगताप को सोमवार को एनआईए की विशेष अदालत के न्यायाधीश डी ई कोठालिकर ने जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत का विस्तृत आदेश बृहस्पतिवार को उपलब्ध कराया गया। तीनों आरोपी कबीर कला मंच के सदस्य हैं।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘रिकॉर्ड में रखे गए पत्रों और दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया यह पता चलता है कि जमानत के सभी तीनों आवेदकों ने प्रतिबंधित संगठन के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर पूरे देश में अशांति पैदा करने और सरकार को राजनीतिक रूप से अस्थिर करने के लिए एक गंभीर साजिश रची थी।’’

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद कागजात प्रथम दृष्टया यह दर्शाते हैं कि आरोपी न केवल प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के सदस्य थे, बल्कि वे संगठन के उद्देश्य से आगे की गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे, जो राष्ट्र के लोकतंत्र को उखाड़ फेंकने के अलावा और कुछ नहीं है।

अदालत ने पत्रों और दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा, ‘‘प्रथम दृष्टया यह पता चलता है कि भाकपा (माओवादी) देश से ‘‘मोदी राज’’ को समाप्त कराने पर आमादा था और वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रोड शो को निशाना बनाकर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या जैसी घटना को अंजाम देने के बारे में भी सोच रहे थे।’’

एनआईए अदालत ने कहा, ‘‘यदि इन आरोपों को उस मामले में उचित परिप्रेक्ष्य में ध्यान में रखा जाता है, तो यह निष्कर्ष निकालने में कोई झिझक नहीं होगी कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला है कि उन्होंने भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को खतरे में डालने या संभावित रूप से खतरे में डालने के इरादे से कार्य किया है। इसके अलावा आरोपियों ने किसी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों की हत्या करके अथवा उन्हें घायल करके भारत में लोगों के एक वर्ग में आतंक फैलाने के इरादे से काम किया।’’

अदालत ने यह भी कहा कि इस बात के भी साक्ष्य हैं कि याचिकाकर्ता पुणे में एल्गार परिषद के आयोजन में शामिल थे।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के पुणे में 31 दिसंबर, 2017 को एल्गार परिषद के कार्यक्रम के बाद भीमा-कोरेगांव में हिंसा फैल गयी थी। यह मामला कार्यक्रम में कथित तौर पर दिए गए उकसाऊ भाषण से जुड़ा है। जगताप, गोरखे और गाइचोड़ को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वे हिरासत में हैं।

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