माली में वायरस और जिहादी खतरे के बावजूद चुनाव होना तय
देश के इस्लामिक विद्रोह से जूझने और हजारों लोगों के घरों के भीतर सिमट जाने से चुनावों में बार-बार देरी हुई।
1.9 करोड़ की आबादी वाले देश में मतदाता नेशनल असेंबली की 147 सीटों के लिए मतदान करेंगे।
देश के इस्लामिक विद्रोह से जूझने और हजारों लोगों के घरों के भीतर सिमट जाने से चुनावों में बार-बार देरी हुई।
विपक्ष के नेता सोमालिया सिसे के अपहरण समेत जिहादी हमलों से 29 मार्च को चुनावों का पहला चरण बाधित हुआ था।
यह 2013 के बाद से देश में पहला संसदीय चुनाव है जब राष्ट्रपति इब्राहिम बूबकर कीटा ने भारी बहुमत हासिल किया था।
माली दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक है।
इसके संघर्षरत क्षेत्र और खराब स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली ने इसे कोरोना वायरस के उच्च जोखिम वाले देशों की सूची में रख दिया है।
देश में कोरोना वायरस के 200 से अधिक मामले सामने आए हैं और 13 लोगों की मौत हो गई है।
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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 19, 2020 01:16 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

