नयी दिल्ली, 14 सितंबर निर्वाचन आयोग ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रतिद्वंद्वी गुटों को छह अक्टूबर को सुनवाई के लिए बुलाया है। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अजित पवार के नेतृत्व वाले एक गुट ने राकांपा नेता शरद पवार के खिलाफ बगावत कर दी थी और पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा करते हुए निर्वाचन आयोग का रुख किया था।
सूत्रों ने बताया कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध संपूर्ण जानकारी पर उचित विचार करने के बाद आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि राकांपा में दो प्रतिद्वंद्वी गुट हैं जिसमें एक का नेतृत्व शरद पवार और दूसरे का नेतृत्व अजित पवार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चूंकि प्रत्येक गुट पार्टी होने का दावा कर रहा है, इसलिए इस मामले में चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 के पैरा 15 के तहत आयोग द्वारा निर्धारण की आवश्यकता है। ऐसे में, आयोग ने दोनों समूहों को छह अक्टूबर को मामले में सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से या अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि आयोग अब चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश के पैरा 15 के तहत सुनवाई शुरू करेगा।
जुलाई की शुरुआत में महाराष्ट्र सरकार में शामिल होने के लिए अपने चाचा शरद पवार के खिलाफ बगावत करने से दो दिन पहले, राकांपा नेता अजित पवार ने 30 जून को निर्वाचन आयोग का रुख किया था और पार्टी के नाम के साथ-साथ चुनाव चिह्न पर भी दावा किया था। बाद में अजित ने 40 विधायकों के समर्थन के साथ खुद को पार्टी अध्यक्ष भी घोषित कर दिया था।
हाल में, शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट ने निर्वाचन आयोग को बताया था कि पार्टी में कोई विवाद नहीं है, सिवाय इसके कि कुछ लोग अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के लिए संगठन से अलग हो गए हैं। इसमें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाले बागी समूह का संदर्भ दिया गया।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY