ताजा खबरें | राज्यसभा के आठ सदस्य निलंबित, नायडू ने उपसभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नामंजूर किया
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने उपसभापति हरिवंश के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव नोटिस को सोमवार को खारिज कर दिया और कहा कि यह उचित प्रारूप में नहीं था। वहीं, रविवार को सदन में अमर्यादित आचरण को लेकर तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और आप के संजय सिंह सहित विपक्ष के आठ सदस्यों को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया।
नयी दिल्ली, 21 सितंबर राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने उपसभापति हरिवंश के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव नोटिस को सोमवार को खारिज कर दिया और कहा कि यह उचित प्रारूप में नहीं था। वहीं, रविवार को सदन में अमर्यादित आचरण को लेकर तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और आप के संजय सिंह सहित विपक्ष के आठ सदस्यों को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया।
निलंबित सदस्यों ने सदन से बाहर जाने से इनकार कर दिया। वे और कुछ अन्य सदस्य इस दौरान सदन में विरोध जताते रहे। हंगामे की वजह से सदन का कामकाज बार बार बाधित हुआ।
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संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कल के हंगामे में असंसदीय आचरण को लेकर विपक्ष के आठ सदस्यों को मौजूदा सत्र के शेष समय के लिए निलंबित किए जाने का प्रस्ताव पेश किया। इसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी।
निलंबित किए गए सदस्यों में कांगेस के राजीव सातव, सैयद नजीर हुसैन और रिपुन बोरा, तृणमूल के ब्रायन और डोला सेन, माकपा के केके रागेश और इलामारम करीम व आप के संजय सिंह शामिल हैं।
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इससे पहले सभापति नायडू ने उपसभापति हरिवंश के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव नोटिस का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष और 46 सदस्यों का एक पत्र मिला है जिसमें आरोप लगाया गया है कि रविवार को कृषि संबंधी दो विधेयकों को पारित किए जाने के दौरान स्थापित संसदीय प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
सभापति ने कहा कि प्रस्ताव निर्धारित प्रारूप में भी नहीं है और इसके लिए जरूरी 14 दिनों के नोटिस का भी पालन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह सत्र एक अक्टूबर को समाप्त हो रहा है इसलिए 14 दिनों की जरूरी समयसीमा का पालन नहीं हो पा रहा है।
नायडू ने कहा कि उन्होंने कल की पूरी कार्यवाही पर गौर किया। उन्होंने कहा कि रिकार्ड के अनुसार उपसभापति ने हंगामा कर रहे सदस्यों से बार-बार अपनी सीट पर जाने, चर्चा में भाग लेने और अपने संशोधन प्रस्ताव पेश करने को कहा था।
शून्यकाल समाप्त होने के बाद नायडू ने कहा कि एक दिन पहले उच्च सदन में कुछ विपक्षी सदस्यों ने जो आचरण किया वह दुखद, अस्वीकार्य और निंदनीय है तथा सदस्यों को इस संबंध में आत्मचिंतन करना चाहिए।
नायडू ने हंगामा करने वाले सदस्यों के व्यवहार की निंदा करते हुए कहा कि कि हरिवंश ने बाद में उन्हें सूचित किया कि उनके खिलाफ अभद्र का इस्तेमाल भी किया गया।
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