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देश की खबरें | शिक्षा समाज को सबसे बड़ा दान: धनखड़

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देश की खबरें | शिक्षा समाज को सबसे बड़ा दान: धनखड़

जयपुर, 30 अप्रैल उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शिक्षा को समाज के लिए सबसे बड़ा दान बताते हुए मंगलवार को कहा कि यह बदलाव का सबसे प्रभावी साधन है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बच्चों पर अपनी इच्छाएं थोपना नहीं चाहिए बल्कि उन्हें नदी की तरह अपना रास्ता खुद बनाने देना चाहिए।

धनखड़ यहां एक निजी विद्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

आधिकारिक बयान के अनुसार धनखड़ ने कहा है कि शिक्षा का दान समाज के लिए सबसे बड़ा दान है। उन्होंने कहा,‘‘सबसे बड़ा धन क्या है? सबसे बड़ा धन ज्ञान है। और सबसे बड़ा दान क्या है? शिक्षा है।’’

धनखड़ ने कहा कि शिक्षा समाज में बदलाव का सबसे प्रभावी माध्यम है क्योंकि हर क्षेत्र में वही लोग नेतृत्व कर रहे हैं जिन्होंने शिक्षा में भी अपना स्थान बनाया।

इस संदर्भ में उन्होंने अपने जीवन में अपने सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ के संस्कारों और अनुभवों के महत्व को याद करते हुए कहा , "मेरा असली जन्म तो सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में ही हुआ।"

बच्चों को अपना भविष्य खुद तय करने की छूट देने का पक्ष लेते हुए धनखड़ ने कहा,‘‘लंबे समय से मैं एक बात कहता आ रहा हूं...बालक का जन्म होते ही लोग तय कर देते हैं - कि यह डॉक्टर बनेगा, यह इंजीनियर बनेगा। किसी ने ध्यान नहीं दिया कि बालक क्या चाहता है? उन्हें नदी की तरह अपना रास्ता स्वयं बनाने दें।’’

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हर बच्चे को उसकी रुचि के अनुरूप अपनी प्रतिभा को अभिव्यक्त करने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।

उन्होंने कहा,‘‘ हमारे संविधान में हमारी पांच हजार साल पुरानी संस्कृति में शिक्षा के महत्व पर विशेष ध्यान दिया गया है।’’

इस संदर्भ में उन्होंने संविधान की मूल प्रति, जिस पर संविधान सभा के सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे, पर अंकित चित्रों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संविधान की मूल प्रति के भाग दो के पृष्ठ पर गुरुकुल का चित्र बना है तो भाग चार वाले पृष्ठ पर कुरुक्षेत्र में श्री कृष्ण द्वारा गीता उपदेश का प्रसंग अंकित है। उन्होंने कहा कि ये चित्र, संविधान सभा द्वारा शिक्षा को दिए गए महत्व को दर्शाते हैं।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने राजस्थान पत्रिका के संस्थापक कर्पूर चन्द कुलिश की प्रतिमा का अनावरण भी किया।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने भारत की बढ़ती आर्थिक क्षमता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि 1991 में भारत की अर्थव्यवस्था लंदन-पेरिस जैसे शहरों के बराबर थी, लेकिन आज ‘हम विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं।’

इस मौके पर उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी एवं राज्यसभा सदस्य घनश्याम तिवाड़ी और राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी भी मौजूद थे।

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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 30, 2024 04:44 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).