देश की खबरें | एडिटर्स गिल्ड ने तथ्य जांच इकाई स्थापित करने के कर्नाटक सरकार के फैसले पर चिंता जताई

नयी दिल्ली, 27 अगस्त एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘‘फर्जी खबरों’’ की निगरानी के लिए तथ्य जांच करने वाली इकाई (फैक्ट चेक यूनिट) स्थापित करने के कर्नाटक सरकार के फैसले को लेकर चिंता व्यक्त की।

गिल्ड ने कहा कि ऐसी सामग्री की जांच करने के प्रयास स्वतंत्र निकायों द्वारा किए जाने चाहिए, जो सरकार के दायरे में नहीं हों, अन्यथा वे असहमति की आवाज को दबाने के साधन बन जाएंगे।

गिल्ड ने एक बयान में कहा कि ऐसे किसी भी निगरानी ढांचे को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए, जिसमें पूर्व सूचना देना, अपील करने का अधिकार और न्यायिक पर्यवेक्षण शामिल है।

बयान में कहा गया है कि ऐसी तथ्य-जांच इकाइयां भी पत्रकारों और मीडिया निकायों सहित सभी हितधारकों के साथ उचित परामर्श और भागीदारी के जरिये स्थापित की जानी चाहिए, ताकि प्रेस की स्वतंत्रता के साथ छेड़छाड़ न हो।

गिल्ड बंबई उच्च न्यायालय में पहले ही एक याचिका दायर कर चुका है, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2023 में संशोधन को चुनौती दी गई है, जो केंद्र सरकार को एक ‘तथ्य-जांच इकाई’ की स्थापना की अनुमति देता है। इसके तहत यह निर्धारित करने का एकमात्र अधिकार सरकार के पास होगा कि क्या फर्जी है और उसके पास सामग्री को हटाने का आदेश देने की भी शक्तियां होंगी।

कर्नाटक के आईटी मंत्री प्रियंक खरगे ने हाल में कहा था कि ‘‘तथ्य-जांच इकाई द्वारा फर्जी के रूप में टैग किए गए पोस्ट और रिपोर्ट को हटा दिया जाएगा’’ और ‘‘यदि आवश्यक हो, तो सरकार भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के संबंधित प्रावधानों के तहत दंडात्मक कदम भी उठा सकती है।’’

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