जरुरी जानकारी | अत्यधिक आयात से खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट जारी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशों में मंदी तथा बंदरगाहों पर आयात की भारी खेप जमा होने के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को सरसों, मूंगफली एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल और बिनौला तेल सहित सभी तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट आई। स्थिति कुछ ऐसी है कि अत्यधिक आयात होने के कारण सस्ते आयातित तेल भी अब ठीक से खप नहीं पा रहे हैं, तो ऐसे में सरसों और सूरजमुखी तिलहन कहां से खपेंगे। आयातित तेलों की कीमत इन तेलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी काफी कम है।
नयी दिल्ली, आठ अगस्त विदेशों में मंदी तथा बंदरगाहों पर आयात की भारी खेप जमा होने के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को सरसों, मूंगफली एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल और बिनौला तेल सहित सभी तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट आई। स्थिति कुछ ऐसी है कि अत्यधिक आयात होने के कारण सस्ते आयातित तेल भी अब ठीक से खप नहीं पा रहे हैं, तो ऐसे में सरसों और सूरजमुखी तिलहन कहां से खपेंगे। आयातित तेलों की कीमत इन तेलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी काफी कम है।
शिकॉगो एक्सचेंज और मलेशिया एक्सचेंज में गिरावट चल रही है।
बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि बंदरगाहों पर आयातित खाद्य तेलों के लदे कई जहाज खड़े हैं और खाली करने के लिए स्थान की कमी हो रही है जिसके एवज में आयातकों को इन जहाजों के लिए ‘डेमरेज’ शुल्क बंदरगाह पर अदा करना पड़ रहा है जिसका बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा में भुगतान करना होता है। अजीबोगरीब स्थिति यह है कि बैंकों में ऋण साख पत्र धुमाते रहने के लिए इन आयातित तेलों को भी लागत से कहीं कम कीमत पर बेचा जा रहा है। ऐसे में बैंकों को नुकसान होगा। तेल संगठनों को इस स्थिति की जानकारी सरकार को देनी चाहिये और खाद्य तेलों से लदे जहाजों को खाली करवाने का इंतजाम करवाना चाहिये।
सूत्रों ने कहा कि जरूरत से अत्यधिक आयात का कोई औचित्य नहीं रहता जब बैंकों का पैसा डूबने का खतरा दिख रहा हो। इसके लिए उचित कदम उठाने की जरूरत है। यह भी देखा जाना चाहिये कि इस स्थिति से देशी तिलहन किसान भारी तनाव में हैं, तेल उद्योग बर्बादी के कगार पर है और अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) अधिक निर्धारित किये जाने के कारण उपभोक्ताओं को भी सस्ता आयातित तेल सस्ते में उपलब्ध नहीं हो रहा। सरकार को इन आयातित तेलों को निविदा मंगाकर सस्ते में खाद्य तेल खरीद कर उन्हें पैकरों को राशन की दुकानों के साथ अन्य विक्रय केन्द्रों पर भिजवाने की ओर ध्यान देना चाहिये ताकि उपभोक्ताओं को यह सस्ता मिल सके।
मंगलवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,750-5,800 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 7,765-7,815 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 18,740 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,720-3,005 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,900 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,805 -1,900 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,805 -1,915 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,250 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,050 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,650 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,100 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,550 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,300 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,450 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,050-5,145 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,815-4,910 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।
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(The above story first appeared on LatestLY on Aug 08, 2023 08:38 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

