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जरुरी जानकारी | खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट का रुख, मूंगफली तेल तिलहन पूर्ववत

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जरुरी जानकारी | खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट का रुख, मूंगफली तेल तिलहन पूर्ववत

नयी दिल्ली, 20 सितंबर विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख के बीच बंदरगाहों पर आयातित खाद्यतेल (सोयाबीन) की लागत से कम दाम पर थोक बिक्री किये जाने से बुधवार को ज्यादातर खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। हालांकि माल की कमी के बीच मूंगफली तेल तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

सरसों और सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तथा बिनौला तेल में जहां गिरावट देखी गई, वहीं मूंगफली तेल-तिलहन, के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

मलेशिया एक्सचेंज में गिरावट रही जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में भी गिरावट है।

सूत्रों ने कहा कि देश के बंदरगाहों पर आयातित तेलों की भरमार के बीच बैंकों के कर्ज की अदायगी के दवाब में आयातक अपने आयात किये गये खाद्यतेलों में सोयाबीन तेल लागत के मुकाबले 6-7 रुपये किलो नीचे दाम पर बेच रहे हैं। देश के प्रमुख तेल संगठनों को इस स्थिति की ओर ध्यान देने और स्थिति को काबू में लाने की आवश्यकता है।

तेल संगठनों को देखना होगा कि खाद्यतेलों के आयात पर लगभग एक लाख 57,000 करोड़ रुपये सालाना खर्च करने वाले देश (भारत) के आयातक, सस्ते में बिकवाली क्यों कर रहे हैं। इस पर लगाम लगाने की आवश्यकता है नहीं तो बैंकों (आम जनता का पैसा) का ही नुकसान होगा।

उन्होंने कहा कि अर्जेन्टीना से भी कम दाम पर थोक में देश के बाजारों में सोयाबीन तेल बिक रहा है। आयात किये जाने वाले सोयाबीन तेल का खरीद भाव 960-970 डॉलर प्रति टन है। वहां से प्रति टन खाद्य तेल लाने का मालभाड़ा 72 डॉलर प्रति टन बैठता है। कांडला बंदरगाह पर इस आयातित तेल की लागत 1,030-1,040 डॉलर प्रति टन बैठती है और आयातक इस तेल को बंदरगाह पर 950-955 डॉलर प्रति टन के भाव बेच रहे हैं।

ऐसा इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। भारत अपनी खाद्य तेल मांग की पूर्ति के लिए लगभग 55 प्रतिशत खाद्यतेलों के आयात पर निर्भर है।

उन्होंने कहा कि इस हिसाब से खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को सोयाबीन तेल अधिक से अधिक 95-100 रुपये लीटर मिलना चाहिये लेकिन खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को यही सोयाबीन तेल 120-135 रुपये लीटर के दाम पर मिल रहा है।

इतनी कवायद के बावजूद अगर उपभोक्ता को खाद्यतेल सस्ता ना मिले तो सारी कवायद निरर्थक है। एक तो इस सस्ते आयात से देश के तिलहन किसान अपनी तिलहन ऊपज नहीं खपने से हताश हैं, तेल मिलों की गतिविधियां लगभग ठप हैं, तेल उद्योग में रोजगार का नुकसान हो रहा है और आयात पर भारी मात्रा में विदेशीमुद्रा खर्च हो रही है।

सूत्रों ने बताया कि सहकारी संस्था, नेफेड ने 18 सितंबर को सरसों बिक्री के लिए मंगवाई गई सारी निविदा को फिलहाल निरस्त कर दिया है।

बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,475-5,525 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 7,540-7,590 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 18,200 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,660-2,945 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,050 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,720 -1,815 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,720 -1,830 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 9,600 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,550 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 7,875 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 7,650 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,150 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 8,950 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,050 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,045-5,140 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,795-4,910 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।

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(The above story first appeared on LatestLY on Sep 20, 2023 09:42 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).