कोलकाता, 19 अगस्त प्रवर्तन निदेशालय ने विश्व भारती विश्वविद्यालय परिसर में सोमवार को हुई हिंसा को लेकर प्रतिद्वंद्वी गुटों द्वारा दर्ज कराई गई दोनों प्राथमिकी की प्रति मांगी है। केंद्रीय जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि संस्थान को बंद करने के लिये मजबूर करने वाले हंगामे के पीछे क्या ‘‘संगठित धन शोधन’’ वजह थी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
इसबीच, स्थानीय प्रशासन द्वारा शांति कायम रखने के लिये बुलाई गई बैठक से इस प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय के अधिकारी दूर रहे।
ईडी में मौजूद सूत्रों ने बताया कि उसने बीरभूम पुलिस अधीक्षक और विश्वविद्यालय प्रशासन को अलग-अलग पत्र भेज कर प्राथमिकी की प्रति मांगी है।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कथित तौर पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के समर्थक कुछ स्थानीय लोगों, दोनों पक्षों ने विश्वविद्यालय परिसर में तोड़फोड़ की घटना के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई है।
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बैठक में शामिल हुए ज्यादातर लोगों ने इसके परिसर में पौष मेला मैदान के चारों ओर बाड़ लगाये जाने के फैसले का विरोध किया। मेले में अपनी वस्तुएं बेचने वाले स्थानीय दस्तकारों एवं शिल्पकारों ने विश्व भारती के फैसले का विरोध किया है।
इस बीच, राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने शांति की अपील की लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले के खिलाफ स्थानीय लोगों का समर्थन करते नजर आये। दरअसल, उन्होंने बाड़ लगाये जाने की जरूरत पर हैरानगी जताई और कहा कि यह नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के आदर्शों के खिलाफ है, जिन्होंने इस विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।
यह मेला उनके पिता देंवद्रनाथ टैगोर ने एक सदी से अधिक समय पहले शुरू किया था।
वहीं, बाड़ लगाने पर अडिग विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि इस कार्य का उद्देश्य मेले में बदमाशों को घुसने से रोकना है जो वहां खतरनाक गतिविधियों में संलिप्त रहते हैं।
विश्वविद्यालय ने बैठक के आयोजन स्थल और समय के बारे में कुलपति विद्युत चक्रवर्ती से परामर्श नहीं करने को लेकर भी नाराजगी जताई।
बीरभूम जिला अधिकारी मौमिता गोदारा ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो अगली बैठक परिसर में की जाएगी।
उन्होंने कहा , ‘‘आज की बैठक में कई लोगों और अन्य हितधारकों ने मैदान की बाड़बंदी किये जाने के फैसले के खिलाफ बोला। ’’
इसबीच, विश्व भारती के शिक्षकों और छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय परिसर में हुई हिंसा की बुधवार को निंदा की।
विश्वविद्यालय संकाय एसोसिएशन का कहना है कि प्रशासन द्वारा कोई भी फैसला लिए जाने से पहले वह सभी पक्षों के बीच बातचीत चाहता है।
तोड़फोड़ की निंदा करते हुए एक बयान में एसोसिएशन ने कहा, ‘‘सभी पक्षों के साथ पहले बातचीत करके इस घटना (हिंसा)को टाला जा सकता था। पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जहां संकट पैदा होने पर संकाय सदस्यों ने अधिकारियों के साथ मिलकर बातचीत की थी।’’
मेला मैदान पर बाड़ लगाने का स्थानीय लोगों द्वारा विरोध किए जाने के अगले दिन 16 अगस्त को कुलपति के नेतृत्व में संकाय सदस्यों द्वारा रैली निकालकर बाड़बंदी का समर्थन करने की घटना का वामपंथी संगठन ने भी विरोध किया है।
बयान में कहा गया है, ‘‘विश्व भारती संकाय सदस्यों और अन्य कर्मचारियों को 16 अगस्त को एकत्र करने का फैसला सही नहीं था क्योंकि इससे उन्हें खतरा हो सकता था।’’
उसमें कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को अतीत में हुई, पौष मेला मैदान से जुड़ी घटनाओं से सबक लेना चाहिए था।
उधर, राज्य के बोलपुर शहर में बुधवार को प्रख्यात डॉक्टर सुशोवन बनर्जी की एक आवक्ष प्रतिमा पर स्याही डाली हुई मिली। पुलिस ने यह जानकारी दी।
बनर्जी ने विश्व भारती मैदान की बाड़बंदी किये जाने का समर्थन किया था, जहां पौष मेला लगा करता है।
पुलिस ने बताया कि स्थानीय लोगों ने सुबह में पाया कि वार्ड नंबर 14 में स्थित बनर्जी की आवक्ष प्रतिमा पर स्याही डाल दी गई है।
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