देश की खबरें | ईडी ने धनशोधन मामले में पीएफआई, उसके अध्यक्ष के खिलाफ देशभर में छापे मारे
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, तीन दिसंबर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन के मामले की जांच के तहत ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ (पीएफआई) के अध्यक्ष ओ एम अब्दुल सलाम और उसके केरल राज्य प्रमुख नसरुद्दीन एलामारोम के परिसरों समेत नौ राज्यों में पीएफआई के कम से कम 26 परिसरों पर बृहस्पतिवार को छापे मारे। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

पीएफआई का 2006 में केरल में गठन हुआ था और इसका मुख्यालय दिल्ली में है। पीएफआई ने इस छापेमारी को किसानों के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए हथकंडा करार दिया।

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आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि चेन्नई, तेनकासी और मदुरै (तमिलनाडु), बेंगलुरु, दरभंगा और पूर्णिया (बिहार), लखनऊ और बाराबंकी (उत्तर प्रदेश), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), कोलकाता और मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल), जयपुर, दिल्ली के शाहीन बाग इलाके और केरल के कोच्चि, मालप्पुरम और तिरुवनंतपुरम जिलों में धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत छापे मारे जा रहे हैं।

केंद्रीय जांच एजेंसी देश में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शनों, इस साल फरवरी में दिल्ली में हुए दंगों और कई अन्य घटनाओं को भड़काने को लेकर ‘‘वित्तीय संबंधों’’ के आरोपों की पीएफआई के खिलाफ जांच कर रही है।

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उन्होंने बताया कि इस छापेमारी का मकसद पीएफआई और उससे संबंधित लोगों के खिलाफ धन शोधन के विभिन्न मामलों में जारी जांच के तहत सबूत एकत्र करना है। धन शोधन संबंधी विभिन्न मामलों को उसके खिलाफ एक “बड़ी जांच” के तहत एक ही मामले में मिला दिया गया है।

सूत्रों ने कहा कि ईडी ने अपनी जांच के तहत केरल सोना तस्करी मामले और अगस्त में बेंगलुरु के दो पुलिस थानों पर हमले की साजिश और हमले, उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक दलित लड़की से कथित सामूहिक दुष्कर्म और खुदकुशी के बाद रुपयों के संदिग्ध हस्तांतरण व ऐसे ही कुछ अन्य आपराधिक मामलों में पीएफआई कार्यकर्ताओं की गतिविधियों को भी शामिल किया है।

सूत्रों ने बताया कि केरल में सलाम और पीएफआई के राष्ट्रीय सचिव एलामारोम तथा संगठन के कई अन्य पदाधिकारियों के परिसरों पर भी छापे मारे जा रहे हैं।

इससे पहले, उसने केरल राज्य विद्युत बोर्ड के वरिष्ठ सहायक सलाम और दिल्ली में पीएफआई के कई अन्य पदाधिकारियों के बयान भी दर्ज किए थे। एजेंसी ने कहा था कि वे खास रकम के स्त्रोत और उसे किस जगह खर्च किया गया, इस बारे में जानकारी नहीं दे सके थे।

पीएफआई ने कहा कि उसकी गतिविधियां “पारदर्शी” व सार्वजनिक हैं और उनके पास छिपाने के लिये कुछ भी नहीं है।

संगठन ने एक बयान में कहा, ‘‘देशभर में पॉपुलर फ्रंट के राष्ट्रीय नेताओं के आवासों पर ईडी ने एक साथ छापे मारे। हमारा मानना है कि यह एजेंसी की ओर से की गई राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई है। इस प्रकार की छापेमारी हमारे देश में अकसर उस समय होती है, जब कभी सत्तारूढ़ सरकार किसी जन आंदोलन के कारण दबाव में होती है और वह देश का ध्यान भटकाना चाहती है।’’

उसने कहा, ‘‘मोदी सरकार ने अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ और देश में असंतोष को दबाने के लिए हमेशा राष्ट्रीय एजेंसियों का इस हद तक इस्तेमाल किया है कि उनकी विश्वसनीयता सवालों के घेरे में आ गई है।’’

उसने कहा कि केंद्र सरकार दिल्ली में किसानों के धरने व प्रदर्शन के कारण भारती दबाव में है और ईडी की छापेमारी कुछ और नहीं, बल्कि उससे ध्यान भटकाने का “हथकंडा” है।

पीएफआई ने कहा कि प्राधिकारी ‘‘संगठन को संविधान विरोधी सीएए-एनआरसी के खिलाफ उसकी लड़ाई से रोकना चाहते है।’’

ईडी ने पिछले महीने ट्वीट किया था, ‘‘ईडी पीएफआई के पदाधिकारियों के पास से बरामद कुछ ठोस साक्ष्यों के आधार पर पीएफआई और भीम आर्मी के बीच वित्तीय जुड़ाव की जांच कर रहा है । ’’

भीम आर्मी ने ‘पीटीआई ’ से कहा था कि वह किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार है। भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद हैं।

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